
Manipur Census controversy: मणिपुर सरकार ने गुरुवार को तीन दिनों के लिए शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का आदेश दिया है। यह फैसला जातीय हिंसा से प्रभावित राज्य में जनगणना को टालने की मांग को लेकर बढ़ते तनाव के बीच लिया गया है। दरअसल, प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि 1951 को आधार वर्ष मानकर पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू किया जाए और उसके बाद ही जनगणना कराई जाए।
मणिपुर में बिगड़ते कानून-व्यवस्था के हालात को देखते हुए शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों को तीन दिनों तक बंद रखने का फैसला किया है। आदेश के अनुसार, 20 अगस्त से 22 अगस्त तक सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद रहेंगे। इसमें सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी संस्थानों के साथ-साथ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद, CBSE और अन्य बोर्डों से संबद्ध संस्थान भी शामिल हैं। यह फैसला मणिपुर के मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल के आदेश पर लिया गया है।
मणिपुर के अलग-अलग समुदायों और नागरिक संगठनों से जुड़े 10 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को दिल्ली रवाना हुआ। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य केंद्र सरकार के सामने जनगणना से पहले NRC लागू करने की मांग रखना है। इंफाल एयरपोर्ट पर रवाना होने से पहले प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने कहा कि राज्य के लोग पहले NRC चाहते हैं, क्योंकि इसके बाद मणिपुर में लंबित परिसीमन की प्रक्रिया होनी है। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे को केंद्रीय मंत्रियों, भाजपा नेताओं और अन्य संबंधित अधिकारियों के सामने उठाएगा।
मैतेई संगठन लंबे समय से NRC लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे 1951 के बाद पड़ोसी देशों से मणिपुर में आकर बसे ऐसे लोगों की पहचान हो सकेगी, जिनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं और जो राज्य के मूल निवासियों के लिए खतरा बन सकते हैं।
वहीं, कूकी संगठनों का आरोप है कि मैतेई संगठन इस मांग की आड़ में मणिपुर के सभी ऐसे लोगों को अवैध या बिना दस्तावेज वाला प्रवासी बताने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी नागरिकता पर सवाल उठाया जा रहा है।
मणिपुर के पड़ोसी राज्य असम में भी NRC को लेकर प्रक्रिया हो चुकी है। वहां 2019 में NRC को अपडेट किया गया था, जिसका उद्देश्य 1971 के बाद असम में आए ऐसे लोगों की पहचान करना था, जिनके पास नागरिकता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं थे।