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MCD टोल टैक्स में 600 करोड़ का घोटाला? AAP का बड़ा आरोप, ब्लैकलिस्ट कंपनी को मिला ठेका

AAP ने MCD के टोल टैक्स टेंडर में करीब 600 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया। ब्लैकलिस्ट कंपनी को ठेका मिलने और ऊंची बोली खारिज होने का दावा। CBI जांच और टेंडर रद्द करने की मांग। पढ़ें पूरी खबर...
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Aug 05, 2026
Aam Aadmi Party MLA Kuldeep Kumar
आम आदमी पार्टी विधायक कुलदीप कुमार (फोटो-IANS)

Municipal Corporation of Delhi: दिल्ली नगर निगम के टोल टैक्स टेंडर को लेकर आप और भाजपा आमने सामने है। आम आदमी पार्टी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करके भाजपा शासित MCD पर टोल टैक्स ठेके में करीब 600 करोड़ रुपए के कथित घोटाले का आरोप लगाया है। साथ ही, इस पूरे मामले में CBI जांच की मांग की है और टेंडर को तत्काल रद्द करने की मांग की है।

ब्लैकलिस्ट कंपनी को मिला ठेका

आप नेताओं ने कहा कि एमसीडी ने अधिक बोली लगाने वाली कंपनी को तकनीकी आधार पर बाहर कर कम बोली लगाने वाली एक ऐसी कंपनी को ठेका दे दिया, जिसे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है।

भाजपा के हर इंजन में भ्रष्टाचार

कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने इसे भाजपा सरकार में व्यापक भ्रष्टाचार का हिस्सा बताया, यह कहते हुए कि दवा और साइकिल खरीद विवादों के बाद अब यह मामला सामने आया है। उनका दावा है कि लगभग 5500 करोड़ रुपए के इस टेंडर को स्टैंडिंग कमेटी की स्वीकृति के बिना ही आगे बढ़ाया गया।

टेंडर की शर्तें खास तरह से तैयार की गई

आप विधायक आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तें इस तरह तैयार की गईं कि लाभ एक खास कंपनी को ही मिले। उनके मुताबिक 5500 करोड़ की बोली को तकनीकी आधार पर हटाकर 4820 करोड़ की बोली लगाने वाली सहकार ग्लोबल लिमिटेड को ठेका सौंपा गया, जिससे निगम को सीधे 680 करोड़ का नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि यह कंपनी लंबे समय से MCD के लिए टोल का काम देख रही है, और NHAI द्वारा हाल में डिबार किए जाने के बावजूद उसे नया ठेका मिल गया, जबकि इस बारे में पहले भी निगम को आगाह किया गया था।

प्रतिस्पर्धा खत्म करने के लिए नई शर्तें जोड़ी गईं

MCD प्रभारी प्रवीण कुमार ने आरोप लगाया कि टेंडर में 122 लेन का एक ही कॉन्ट्रैक्ट रखने और 24 महीने की अवधि जैसी शर्तें फिर से जोड़ी गईं, जिससे प्रतिस्पर्धा घट गई, जबकि इससे पहले ज्यादा कंपनियों की भागीदारी और बेहतर राजस्व के लिए यही शर्तें हटाई गई थीं। उनका कहना है कि टेंडर में मौजूद नेगोशिएशन के प्रावधान का भी इस्तेमाल नहीं किया गया।

पार्टी की सह-प्रभारी प्रीति डोगरा ने कहा कि पहले से वित्तीय तंगी से गुजर रही MCD के लिए ज्यादा राजस्व वाली बोली को नज़रअंदाज करना गंभीर सवाल उठाता है, और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। पार्षद राजीव चौधरी ने कहा कि इस तरह के मामलों की वजह से वार्डों में विकास कार्यों के लिए फंड की कमी बनी रहती है। आम आदमी पार्टी ने कहा कि टेंडर को रद्द किया जाए, स्वतंत्र CBI जांच हो, और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों-नेताओं पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

Updated on:
05 Aug 2026 09:10 pm
Published on:
05 Aug 2026 09:10 pm