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बच गई मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी; बिहार विधान परिषद के लिए हुए मनोनीत, राज्यपाल ने दी मंजूरी

Minister Deepak Prakash: बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को राज्यपाल कोटे से बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया है। राज्यपाल ने कैबिनेट की सिफारिश पर इसे मंजूरी दी। देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हो गई थी।
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पटना

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Anand Shekhar

Aug 05, 2026

bihar minister deepak prakash

बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश (फोटो- दीपक प्रकाश फेसबुक)

Bihar MLC Deepak Prakash: बिहार के पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के नेता दीपक प्रकाश को लेकर बनी बड़ी राजनीतिक और संवैधानिक अनिश्चितता अब पूरी तरह खत्म हो गई है। बिहार कैबिनेट के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए राज्यपाल ने दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद (MLC) का सदस्य मनोनीत कर दिया है। राज्यपाल की मंजूरी के साथ ही NDA सरकार में दीपक प्रकाश का मंत्री पद अब सुरक्षित हो गया है। यह मनोनयन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता देवेश कुमार द्वारा खाली की गई विधान परिषद सीट पर हुआ है।

देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई थी सीट

दीपक प्रकाश बिना किसी सदन (विधान सभा या विधान परिषद) के सदस्य बने ही बिहार सरकार में मंत्री के तौर पर काम कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट में इस बात पर सवाल उठने के बाद कि कोई मंत्री बिना चुने गए छह महीने से ज़्यादा समय तक पद पर कैसे बना रह सकता है, NDA गठबंधन के अंदर हलचल बढ़ गई थी। जिसके बाद संवैधानिक संकट से बचने और गठबंधन धर्म निभाते हुए BJP ने एक अहम कदम उठाया।

राज्यपाल के कोटे से मनोनीत BJP MLC देवेश कुमार ने बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को अपना इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि, उनका कार्यकाल मार्च 2027 तक चलना था, लेकिन देवेश कुमार ने मंत्री दीपक प्रकाश के लिए रास्ता बनाने के लिए इस्तीफा दे दिया। इसके बाद राज्य कैबिनेट ने देवेश कुमार की खाली हुई सीट पर दीपक प्रकाश को मनोनीत करने का प्रस्ताव राजभवन भेजा, जिसे राज्यपाल ने मंजूरी दे दी।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बैकफूट पर थी सरकार

संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत, कोई व्यक्ति बिना किसी सदन का सदस्य बने अधिकतम छह महीने तक मंत्री पद पर रह सकता है। उनके लिए उस छह महीने की अवधि के भीतर विधानसभा या विधान परिषद की सदस्यता हासिल करना अनिवार्य है। नई NDA सरकार के गठन के बाद दीपक प्रकाश ने मंत्री पद की शपथ ली थी। छह महीने की समय सीमा समाप्त होने के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब मांगा था कि कोई व्यक्ति, जो निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है, इतने लंबे समय तक मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने तुरंत कार्रवाई की थी।

एक-दो दिन में शपथ ग्रहण संभव

राजभवन से मंजूरी मिलने के साथ ही मनोनयन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब विधान परिषद सचिवालय द्वारा नोटिफ़िकेशन जारी किए जाने के बाद, एक-दो दिन में शपथ ग्रहण हो सकता है, जिसमें विधान परिषद के सभापति दीपक परक्ष को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।