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काठमांडू में 52 यात्री फंसे, अब कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने जारी एडवाइजरी

MEA Advisory: भारतीय विदेश मंत्रालय ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अहम एडवाइजरी जारी की है। जानें क्यों 52 भारतीय काठमांडू में फंस गए, यात्रा से पहले किन दस्तावेज़ों का होना जरूरी है और MEA ने क्या सलाह दी है।
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Jun 28, 2026
kailash mansarovar yatra News
कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय (फाइल फोटो - ANI)

MEA on Kailash Mansarovar Yatra: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले भारतीयों के नेपाल के काठमांडू में फंसे होने की खबर सामने आने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले भारतीय सभी आवश्यक यात्रा दस्तावेज़ प्राप्त किए बिना अपनी यात्रा शुरू न करें।

यह एडवाइजरी उन खबरों के बाद जारी की गई है, जिनमें बताया गया कि कई भारतीय श्रद्धालु वैध चीनी वीजा और प्रवेश परमिट नहीं होने के कारण नेपाल में फंस गए हैं।विदेश मंत्रालय ने कहा, पुष्ट यात्रा दस्तावेजों के बिना या बाद में दस्तावेज मिलने की उम्मीद में यात्रा शुरू करने से यात्रियों के बीच रास्ते में फंसने की आशंका बढ़ जाती है।मंत्रालय ने यह भी सलाह दी कि श्रद्धालु यात्रा की बुकिंग करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि उनका टूर ऑपरेटर विधिवत पंजीकृत और अधिकृत है।

काठमांडू में 52 भारतीय श्रद्धालु फंसे

आपको बता दें कि एडवाइजरी ऐसे समय में जारी की गई है, जब खबरें सामने आई हैं कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे लगभग 52 भारतीय नागरिक नेपाल की राजधानी काठमांडू में फंसे हुए हैं और उन्हें आगे की यात्रा जारी रखने के लिए तत्काल सहायता की आवश्यकता है।

इस मुद्दे को एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने उठाया। उन्होंने विदेश मंत्रालय तथा नेपाल और चीन स्थित भारतीय दूतावासों से हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे लगभग 52 भारतीय नागरिक इस समय नेपाल के काठमांडू में फंसे हुए हैं और उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है।'

उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास, बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय से श्रद्धालुओं को आवश्यक सहायता प्रदान करने तथा उनकी सुरक्षित आगे की यात्रा सुनिश्चित करने की अपील की।

आपको बता दें कि यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब 20 जून को कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले जत्थे ने भारत-चीन सीमा पर स्थित नाथू-ला के रास्ते चीन में प्रवेश किया था। इसके साथ ही लंबे अंतराल के बाद इस पारंपरिक यात्रा मार्ग पर कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू हुई।

Updated on:
28 Jun 2026 10:07 am
Published on:
28 Jun 2026 09:39 am