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Middle East Tensions: बहरीन ने ईरान पर लगाया ड्रोन हमले का आरोप, बोला- तेहरान ने तोड़ा समझौता

Middle East Crisis: मध्य-पूर्व में तनाव फिर बढ़ गया है। बहरीन ने ईरान पर ड्रोन हमले का आरोप लगाया, वहीं होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकर पर हमला हुआ।
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Iran fires several drones at Bahrain.

ड्रोन - (प्रतीकात्मक तस्वीर - ANI)

Iran Drone Attack: मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ जहां अमेरिका ने ईरान पर हमले का दावा किया तो वहीं तेहरान ने भी इलाके में मौजूद अमेरिका सैन्य ठिकानों पर पलटवार किया। इन सबके बीच शनिवार को होर्मुज स्ट्रेट में एक तेल टैंकर पर हमला हुआ, जिसकी पुष्टि ब्रिटिश सेना की UKMTO ने भी की। उधर, बहरीन ने आरोप लगाया ईरान ने उस पर हमला कर समझौते का उल्लंघन किया है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है।

'टाइम्स ऑफ इजराइल' के मुताबिक, बहरीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि आज तड़के उसकी संप्रभुता का घोर उल्लंघन किया गया। ईरान ड्रोनों द्वारा उसके क्षेत्र को निशाना बनाया गया है। इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए उसने ईरान पर शांति प्रयासों को बाधित करने का आरोप भी लगाया। खास बात यह है कि मध्य-पूर्व में जारी युद्ध को समाप्त करने के अमेरिका-ईरान के अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद हुई। इन हमलों के बाद यह आशंका फिर बढ़ गई है कि ईरान से जुड़ा संघर्ष एक बार फिर नियंत्रण से बाहर हो सकता है।

'बहरीन को निशाना बनाना संयोग नहीं'

ईरान द्वारा बहरीन को निशाना बनाना महज एक संयोग नहीं था। बहरीन ईरान के सबसे कड़े आलोचकों में से एक रहा है। हाल ही में बहरीन ने खाड़ी सहयोग परिषद के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी की, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी उपस्थित थे। यह बैठक ईरान के हमलों को रोकने और जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने की मांग के साथ समाप्त हुई थी।

उधर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, विवादों को बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए, लेकिन अगर हिंसा जारी रहती है तो जवाब उसी तरह दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समझौते के लागू होने को लेकर कोई मतभेद है तो ईरान को फोन पर बातचीत करनी चाहिए।

समुद्री मार्गों पर आवाजाही मुक्त होना जरूरी: पाकिस्तान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी समुद्री मार्गों पर आवाजाही मुक्त करने की अहमियत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा, आज के समय में समुद्र में आवाजाही का अधिकार सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए बुनियादी जरूरत बन चुका है।