राष्ट्रीय

मद्रास हाईकोर्ट से DMK प्रमुख एमके स्टालिन को झटका, TVK विधायक VS बाबू की जीत के खिलाफ याचिका खारिज

MK Stalin: मद्रास हाईकोर्ट ने कोलाथुर सीट से टीवीके विधायक वीएस बाबू के चुनाव को चुनौती देने वाली डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना। पढ़ें पूरी खबर...
2 min read
Sep 03, 2026
VVPAT Slip Matching, Post Counting Verification
टीवीके विधायक वीएस बाबू और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन / फोटो सोर्स- X(@Ayyappan_1504)

TVK MLA VS Babu: मद्रास हाईकोर्ट ने कोलाथुर विधानसभा चुनाव से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने डीएमके अध्यक्ष और कोलाथुर सीट से उम्मीदवार रहे एमके स्टालिन की याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इस याचिका में पोस्ट-काउंटिंग सत्यापन के दौरान वीवीपैट पर्चियों के मिलान में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कोलाथुर से टीवीके विधायक वीएस बाबू की जीत को रद्द करने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद चुनाव परिणाम को दी गई कानूनी चुनौती समाप्त हो गई है।

क्या था पूरा मामला?

कोलाथुर विधानसभा सीट पर चुनाव के बाद हुई मतगणना के दौरान वोटों के सत्यापन को लेकर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता का तर्क था कि पोस्ट-काउंटिंग सत्यापन की प्रक्रिया में वीवीपैट पर्चियों के मिलान के समय गड़बड़ी हुई थी। इसी आधार पर मतगणना के आंकड़ों और प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए विजयी उम्मीदवार वीएस बाबू के निर्वाचन को रद्द करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था।

अदालत ने क्यों खारिज की याचिका?

मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने याचिका के कानूनी पहलुओं और तर्को की समीक्षा की। अदालत ने पाया कि याचिका में प्रस्तुत किए गए आधार कानूनी रूप से सुनवाई योग्य नहीं हैं। तकनीकी और कानूनी मापदंडों पर खरा न उतरने के कारण हाईकोर्ट ने मामले में आगे सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज करने का फैसला सुनाया।

आयोग की दलील, याचिकाओं की बाढ़ का डर

मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के वरिष्ठ वकीलों जी. राजगोपालन और दामा शेषाद्री नायडू ने कोर्ट में बड़ा तर्क दिया। उन्होंने कहा कि अगर सामान्य रिट याचिका के ज़रिए किसी विधायक के चुनाव को चुनौती देने की अनुमति मिली, तो इससे गलत परंपरा शुरू हो जाएगी। नतीजों से असंतुष्ट कई अन्य उम्मीदवार भी कोर्ट पहुंचने लगेंगे, जिससे अदालतों में याचिकाओं का तांता लग जाएगा।

स्टालिन का पक्ष- आयोग की वजह से हुई देरी

दूसरी ओर, एमके स्टालिन ने स्पष्ट किया कि वे तय 45 दिनों की कानूनी समय सीमा के भीतर याचिका इसलिए दाखिल नहीं कर पाए, क्योंकि चुनाव आयोग के स्तर पर ही देरी हुई थी। उन्होंने बताया कि कोलाथुर सीट की 5% ईवीएम मशीनों की 'बर्न-इन मेमोरी' और 'माइक्रो-कंट्रोलर' की जांच बाकी थी, जिसे कंपनियों के इंजीनियरों की टीम को पूरा करना था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि उन्होंने कोलाथुर की कुल 286 ईवीएम में से 14 सेटों के सत्यापन की मांग की थी। उनकी यह मांग साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए उस फैसले पर आधारित है, जो दूसरे या तीसरे स्थान पर रहने वाले प्रत्याशी को 5% ईवीएम की जांच कराने का अधिकार देता है।

Updated on:
03 Sept 2026 11:54 am
Published on:
03 Sept 2026 11:41 am