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राजस्थान-UP के सरकारी स्कूलों में एंट्री पर रोक मामला; याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

Rajasthan-UP Government School Entry Ban case : राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका को खारिज कर दिया।
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भारत

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kamlesh sharma

Sep 03, 2026

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (Photo- ANI)

Rajasthan-UP Government School Supreme Court : नई दिल्ली। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, पत्रकारों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों की एंट्री तथा फोटो-वीडियोग्राफी पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करने से मना कर दिया। पीठ ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस रिट याचिका पर सुनवाई करने की इच्छुक नहीं है। इसके साथ ही याचिका खारिज हो गई।

राजस्थान और उत्तर प्रदेश के आदेशों को दी गई थी चुनौती

याचिका में राजस्थान और उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर जारी किए गए आदेशों को चुनौती दी गई थी। इसमें पत्रकारों, यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया यूजर्स और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों की स्कूलों में एंट्री के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य किए जाने का मुद्दा उठाया गया था।

राजस्थान के मामले में याचिका में 16 अगस्त 2026 को माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से जारी सर्कुलर का हवाला दिया गया था। इसके तहत सरकारी स्कूल परिसर में किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य से पूर्व अनुमति लेना जरूरी किया गया है। साथ ही फोटो खींचने, वीडियो बनाने, इंटरव्यू करने, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए भी लिखित अनुमति का प्रावधान किया गया है।

यूपी में भी कई जिलों में जारी हुए निर्देश

उत्तर प्रदेश के मामले में याचिका में अयोध्या के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से 19 अगस्त को जारी आदेश का उल्लेख किया गया। इसमें बाहरी लोगों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों को बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के परिषदीय स्कूलों में प्रवेश करने तथा फोटो या वीडियो बनाने से रोकने के निर्देश दिए गए थे। याचिका के अनुसार, आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा समेत कई अन्य जिलों में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए हैं।

'स्कूल ठीक करो' अभियान के बीच मामला चर्चा में

यह मामला कोकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से चलाए जा रहे 'स्कूल ठीक करो' अभियान के बीच सामने आया। अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। याचिका में कहा गया था कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति से जुड़े जनहित के मुद्दों की तस्वीरें और वीडियो सामने लाने पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।

बच्चों की निजता और जनहित के बीच संतुलन की दलील

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि बच्चों की निजता, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा करना जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर सरकारी स्कूलों के भौतिक ढांचे की सार्वजनिक हित में रिकॉर्डिंग पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती। याचिका में बच्चों की पहचान वाली तस्वीरें या वीडियो बनाने और स्कूल की इमारत, कक्षाओं, शौचालय, पेयजल, बिजली, मिड-डे मील तथा अन्य सुविधाओं का दस्तावेजीकरण करने के बीच अंतर बताया गया।

मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का लगाया आरोप

याचिका में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के आदेशों को संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(g), 21 और 21-A में मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया था। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि दोनों राज्यों के उन आदेशों को उस सीमा तक रद्द किया जाए, जहां वे जनहित में स्कूलों के दस्तावेजीकरण पर व्यापक प्रतिबंध लगाते हैं। साथ ही किसी भी तरह के नियमन को उचित, आवश्यक और आनुपातिक बनाए रखने के निर्देश देने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।