
RSS chief Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि विकास का लक्ष्य समाज के हर व्यक्ति का कल्याण होना चाहिए और इसमें सबसे पीछे खड़े व्यक्ति को केंद्र में रखा जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकास के उच्चतम और निम्नतम स्तर के बीच का अंतर जितना संभव हो, उतना कम होना चाहिए। महाराष्ट्र के यवतमाल में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने 'अंत्योदय' की अवधारणा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश की खुशहाली तभी संभव है, जब समाज की आखिरी पंक्ति में खड़ा व्यक्ति भी अधिक से अधिक खुश हो।
मोहन भागवत ने कहा कि इतने बड़े समाज में यह संभव नहीं है कि विकास के मामले में हर व्यक्ति एक ही स्तर पर हो। हालांकि, समाज के सबसे विकसित और सबसे कम विकसित वर्ग के बीच का अंतर कम से कम रखने की कोशिश होनी चाहिए। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने विकास को केवल 'अधिकतम लोगों का अधिकतम भला' करने तक सीमित नहीं माना था। उनके अनुसार विकास में सभी का कल्याण शामिल होना चाहिए। भागवत ने महात्मा गांधी के उस विचार का भी जिक्र किया, जिसमें किसी फैसले के प्रभाव का आकलन समाज के सबसे कमजोर और आखिरी व्यक्ति को ध्यान में रखकर करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि कोई भी काम करने से पहले यह सोचना चाहिए कि उसका समाज के आखिरी व्यक्ति के जीवन पर सकारात्मक असर पड़ेगा या नहीं।
RSS प्रमुख ने कहा कि विकास का मतलब केवल आर्थिक प्रगति नहीं होना चाहिए। इसके तहत हर व्यक्ति की भोजन, कपड़े और मकान जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी होनी चाहिए। इसके साथ शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच भी सुनिश्चित होनी चाहिए।उन्होंने लोगों के सम्मान के साथ जीवन जीने और दूसरों का स्वागत करने की क्षमता को भी विकास का हिस्सा बताया। भागवत ने कहा कि विकास की प्रक्रिया में प्रकृति की कीमत नहीं चुकाई जानी चाहिए और विकास तथा पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
कृषि के मुद्दे पर भागवत ने किसानों के कल्याण के साथ जमीन की सेहत बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने मिश्रित और जैविक खेती, पशुपालन तथा बीज, खाद और कीटनाशकों के मामले में अधिक आत्मनिर्भरता की बात कही। उन्होंने कहा कि किसानों को कर्ज के जाल में फंसने से बचाने और उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।