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मौसम दिखाएगा गर्मी में अलग खेल: इस बार सामान्य से 59 प्रतिशत कम हुई बारिश, मानसून पर पड़ेगा इफेक्ट

Climate Change Impact: देश में इस बार के विंटर सीजन (जनवरी-फरवरी) में सामान्य से 59 प्रतिशत कम बारिश हुई है। विंटर सीजन में देश में औसत बारिश 38.9 मिमी की तुलना में 15.9 मिमी बारिश ही हुई। दो माह के इस सीजन में राजधानी दिल्ली में 36 प्रतिशत, राजस्थान में 12 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 59 […]

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Feb 28, 2026
अपडेट (इमेज सोर्स: चैट GPT AI जनरेटेड)

Climate Change Impact: देश में इस बार के विंटर सीजन (जनवरी-फरवरी) में सामान्य से 59 प्रतिशत कम बारिश हुई है। विंटर सीजन में देश में औसत बारिश 38.9 मिमी की तुलना में 15.9 मिमी बारिश ही हुई। दो माह के इस सीजन में राजधानी दिल्ली में 36 प्रतिशत, राजस्थान में 12 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 59 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ राज्य में 93 प्रतिशत बारिश की कमी रही। वहीं हिमालयी रेंज के राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल व उत्तराखंड में बर्फबारी व मैदानों तक बारिश व शीतलहर के दिन कम हो गए।

कमजोर विंटर सीजन का असर अब आगामी गर्मी की सीजन और मानसून पर पड़ेगा। इसके संकेत दिखने भी लगे हैं। फरवरी में ही सर्दी का मौसम सीधे गर्मी में बदल गया है। कई राज्यों में तापमान अचानक बढ़ते हुए करीब 35 डिग्री पहुंच गया है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के ट्रेंड के चलते इस साल गर्मी के तेवर मार्च-अप्रेल में ही तीखे होने वाले हैं। मार्च में ही पारा 40 डिग्री पार पहुंच सकता है। लू का असर मार्च से मई तक लंबी व तीव्र हो सकता है।

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राज्यों में बारिश का कमी प्रतिशत (माइनस %)

राज्यकमी (प्रतिशत)
जम्मू-कश्मीर60%
हिमाचल प्रदेश42%
उत्तराखंड53%
दिल्ली36%
पंजाब25%
हरियाणा26%
राजस्थान12%
मध्य प्रदेश59%
छत्तीसगढ़93%
उत्तर प्रदेश58%
गुजरात76%
महाराष्ट्र91%
ओडिशा91%
तेलंगाना61%

रबी की पछेती फसलों को नुकसान-

विंटर सीजन में कम बारिश का असर देश में रबी की पछेती बुवाई वाली फसलों (गेहूं, चने, सरसों, मसूर, मटर आदि ) पर पड़ा है। वो फसलें प्रभावित हुई हैं, जो बारिश पर ही निर्भर थी। बारिश की कमी के साथ अचानक गर्मी बढ़ने से पछेती फसलें समय से पहले ही पक गई और उनकी पैदावार व गुणवत्ता पर असर दिखाई दे रहा है। हालांकि रबी की अगेती बुवाई की फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। क्योंकि पोस्ट मानसून की बारिश से इन फसलों को अच्छी नमी मिल गई थी। पोस्ट मानसून यानी अक्टूबर से दिसंबर तक 34.2 मिमी ( सामान्य से 11 प्रतिशत ज्यादा) बारिश ने अगेती फसलों को जीवनदान दे दिया था।

कमजोर विंटर सीजन का यह प्रभाव-

तात्कालिक:

-रबी की पछेती फसलें समय से पहले पकी, पैदावार व गुणवत्ता पर असर पड़ेगा।

-फरवरी के तीसरे सप्ताह से देश के कई राज्यों के तापमान में अचानक व तेजी से बढ़ोतरी हुई।

आगामी असर-

लंबी और तीव्र हीटवेव : कम सर्दी बारिश से गर्मी जल्दी और तेजी से आ रही है। मार्च अंत तक कई जगहों का तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस, अप्रेल में 40 डिग्री तथा मई में 42-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा जोखिम की आशंका। इससे प्री-मानसून डिस्टर्ब हो सकता है।

पानी संकट : कम सर्दी व कम बारिश से ग्राउंडवाटर रिचार्ज कम हुआ। सिंचाई और पीने के पानी पर दबाव व फसलों पर हीट स्ट्रेस बढ़ेगा।

मानसून 2026 पर प्रभाव : वर्तमान में प्रशांत महासागर में कमजोर ला नीना के बाद अलनीनाे की 60 प्रतिशत संभावना के चलते मानसून कमजोर हो सकता है। बारिश कम और अनियमित होने पर परेशानी बढ़ सकती है। सूखे की आशंका गहरा सकती है।

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