
केरल में कांग्रेस मुख्यमंत्री चेहरे पर फंसी हुई है
CM Face Kerala: केरल में चुनाव जीतने के बाद भी कांग्रेस अब तक मुख्यमंत्री का चेहरा तय नहीं कर पाई है। नतीजे आए करीब एक हफ्ता हो चुका है, लेकिन पार्टी के भीतर चल रही खींचतान खत्म होने का नाम नहीं ले रही। मामला अब सिर्फ नेताओं की पसंद तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यकर्ताओं, सहयोगी दलों और कांग्रेस हाईकमान के बीच भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। सबसे ज्यादा चर्चा दो नामों को लेकर है। पहला कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल (KC Venugopal) और दूसरा वडासेरी दामोदरन सतीशन ( VD Satheesan)। पार्टी के भीतर हालात ऐसे बन गए हैं कि राहुल गांधी भी मुश्किल स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।
केरल में कांग्रेस कार्यकर्ता खुलकर वीडी सतीशान के समर्थन में उतर आए हैं। राज्य के कई हिस्सों में रैलियां और प्रदर्शन किए गए। समर्थकों का कहना है कि वाम मोर्चे के खिलाफ असली लड़ाई सतीशन ने जमीन पर लड़ी, इसलिए मुख्यमंत्री बनने का पहला हक भी उन्हीं का है। हालांकि कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व इस तरह के प्रदर्शनों से खुश नहीं बताया जा रहा। पार्टी हाईकमान ने सतीशन को ऐसे कार्यक्रम रोकने के निर्देश भी दिए हैं। लेकिन इसके बावजूद कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
दूसरी तरफ पार्टी के भीतर विधायकों का बड़ा वर्ग वेणुगोपाल के समर्थन में बताया जा रहा है। कांग्रेस की ओर से केरल भेजे गए पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक ने विधायकों और स्थानीय नेताओं से बातचीत के बाद अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर विधायक वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में हैं। उन्हें राहुल गांधी के करीबी नेताओं में भी गिना जाता है। यही वजह है कि दिल्ली में बैठे कई वरिष्ठ नेता भी उनकी दावेदारी को मजबूत मान रहे हैं।
वेणुगोपाल फिलहाल अलप्पुझा से लोकसभा सांसद हैं। अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो उन्हें विधानसभा सदस्य बनना पड़ेगा। इससे एक लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने की जरूरत पड़ेगी। इसी बीच पार्टी के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि राहुल गांधी भविष्य में वेणुगोपाल को संगठन में और बड़ी जिम्मेदारी दे सकते हैं। अगले साल मल्लिकार्जुन खरगे का कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल खत्म होना है, इसलिए पार्टी के भीतर कई तरह की राजनीतिक संभावनाएं देखी जा रही हैं।
कांग्रेस नेतृत्व के सामने वायनाड लोकसभा सीट भी बड़ा फैक्टर बनकर उभरी है। इस सीट का प्रतिनिधित्व फिलहाल प्रियंका गांधी कर रही हैं। यहां मुस्लिम वोटरों की संख्या 45 प्रतिशत से ज्यादा मानी जाती है। कांग्रेस नहीं चाहती कि मुख्यमंत्री चयन के फैसले से मुस्लिम वोट बैंक नाराज हो। यही वजह है कि IUML की राय को भी काफी गंभीरता से लिया जा रहा है।
केरल विधानसभा की 140 सीटों में UDF गठबंधन को 102 सीटें मिली हैं। लेकिन कांग्रेस के पास अकेले 63 विधायक ही हैं। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने 22 सीटें जीती हैं। बाकी सीटें अन्य सहयोगी दलों के खाते में गई हैं। ऐसे में सहयोगी दलों की राय भी काफी अहम हो गई है। बताया जा रहा है कि IUML समेत कई सहयोगी सतीशान के पक्ष में हैं। पार्टी को यह भी डर है कि अगर सहयोगियों की राय नजरअंदाज की गई तो इसका असर भविष्य की राजनीति पर पड़ सकता है।
स्थिति को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान ने केरल के वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुला लिया है। अब इस प्रक्रिया में सोनिया गांधी, ए. के. एंटनी और UDF के अन्य सहयोगी दलों को भी शामिल किए जाने की चर्चा है। कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहता। पार्टी को डर है कि गलत फैसला आगे चलकर बड़े राजनीतिक नुकसान की वजह बन सकता है। केरल विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 23 मई तक है, इसलिए पार्टी के पास अभी कुछ समय बचा हुआ है।
Published on:
11 May 2026 07:35 am
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