
AIMPLB Jantar Mantar Protest:ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन के स्थगित होने पर इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती वजाहत कासमी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को इस तरह की गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। कासमी ने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड ऐसा संगठन नहीं है, जिसे इस तरह की गतिविधियां करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
इस दौरान उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर मुसलमानों को भड़काने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि AIMPLB तीन तलाक से लेकर वक्फ बिल तक लगातार मुसलमानों को भड़काता रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि बोर्ड में ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें वह सामने लाना चाहते हैं, क्योंकि उनके अनुसार वे लगातार मुसलमानों को प्रधानमंत्री के खिलाफ उकसाते रहे हैं। उन्होंने इसे नफरत फैलाने वाली राजनीति बताते हुए कहा कि ऐसी राजनीति उचित नहीं है।
कासमी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन स्थगित होने के बावजूद बोर्ड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर माहौल को गर्म करने की कोशिश की, जो उनके मुताबिक निंदनीय है।
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा जवाहरलाल नेहरू के पुराने बयान का हवाला दिए जाने पर भी मुफ्ती वजाहत कासमी ने प्रतिक्रिया दी। नेहरू के उस बयान में भारत के लिए कम्युनिज्म के बजाय हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को खतरा बताया गया था।
कासमी ने कहा कि हामिद अंसारी पहली बार इस तरह की टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। उनके मुताबिक, संवैधानिक पद से हटने के बाद से अंसारी लगातार हिंदुओं को लेकर ऐसी टिप्पणियां करते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब अंसारी उपराष्ट्रपति थे, तब लोकसभा, राज्य सभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में बड़ी संख्या में हिंदू जनप्रतिनिधि थे। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों में अधिकारी और राजदूत के रूप में अंसारी को मिली सरकारी सुविधाओं का खर्च देश के करदाताओं से आता था।
कासमी ने कहा कि अंसारी की उम्र को देखते हुए उन्हें ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि अंसारी पहलगाम और लाल किले से जुड़े आतंकी हमलों तथा जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ भी इसी तरह स्पष्ट रूप से बोलते।
इटली में स्कूलों में बुर्का और नकाब पर प्रस्तावित प्रतिबंध को लेकर पूछे गए सवाल पर मुफ्ती वजाहत कासमी ने कहा कि हर देश को अपनी सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कानून बनाने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई देश अपनी सुरक्षा, संरक्षण या व्यवस्था के लिए कुछ कदम उठाता है, तो हमें उस देश के कानूनों का सम्मान करना चाहिए। अगर इटली ने ऐसा कानून बनाया है, तो निश्चित रूप से वहां की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया होगा और हम उसका सम्मान करेंगे।