
Myanmar Training Module NIA Investigation: पिछले दिनों भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया। जिसमें बताया गया कि देश को तोड़ने की साजिश पडोशी मुल्क म्यांमार की जा रही थी। इसके जरिए रसिया को भी दहलाने की कोशिश थी।
इसी मामले में जांच एजेंसी NIA ने पांच यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए। इसके बाद मिजोरम के रास्ते बिना जरूरी अनुमति के म्यांमार पहुंचे। वहां उन्होंने कुछ आर्म्ड ग्रुप को ड्रोन और आधुनिक युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग दी। अब इस मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।
इस मामले का खुलासा रूस की खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद हुआ। जानकारी मिलने पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान विदेशी नागरिकों को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया।
NIA के मुताबिक, विदेशी नागरिक पर्यटक वीजा पर भारत आए थे। इसके बाद वे मिजोरम पहुंचे और वहां से बिना परमिट के म्यांमार में दाखिल हो गए। जांच एजेंसी का दावा है कि म्यांमार में इनका संपर्क वहां सक्रिय जातीय हथियारबंद ग्रुप्स से हुआ। इन लोगों ने इन समूहों को ड्रोन उड़ाने, ड्रोन असेंबल करने, ड्रोन जैमिंग और आधुनिक युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग दी। ऐसे में एजेंसी का कहना है कि इस गतिविधि का असर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता था। इसी वजह से UAPA की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया गया।
शुक्रवार को पांच यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को भारी सुरक्षा के बीच पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है।
दरअसल, NIA का कहना है कि यह केवल एक सामान्य मामला नहीं है। एजेंसी के अनुसार यह एक अंतरराष्ट्रीय साजिश से जुड़ा नेटवर्क हो सकता है। इसी कारण उसने अदालत से जांच पूरी करने के लिए 90 दिनों की जगह 180 दिन का समय मांगा है।
जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपियों के कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं। इन सभी की फोरेंसिक जांच अभी जारी है। इसके अलावा आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फंडिंग कहां से हुई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
NIA ने अदालत से आरोपियों के वॉयस सैंपल लेने की भी अनुमति मांगी है। ताकि इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का मिलान किया जा सके। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी अहम चरण में है। कई अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की जांच बाकी है।
जांच एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि अगर इस समय आरोपियों को रिहा किया गया तो वे देश छोड़ सकते हैं या सबूतों और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए उन्हें न्यायिक हिरासत में रखा गया है। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है। आने वाले दिनों में फोरेंसिक रिपोर्ट, वित्तीय जांच और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के आधार पर कई नए खुलासे सामने आ सकते हैं।