
Saugata Roy on NCPI NDA Meeting: एनडीए की बैठक में शामिल नहीं होने के फैसले को लेकर तीन नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) सांसदों पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय ने कहा कि कोई भी पार्टी एक साथ दो अलग-अलग रास्तों पर नहीं चल सकती। उन्होंने कहा कि अगर एनसीपीआई भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ रहती है तो उसे भाजपा की नीतियों को भी स्वीकार करना होगा।
सौगत रॉय ने कहा, "एक साथ दो नावों पर सवार नहीं हुआ जा सकता। अगर वे एनसीपीआई में रहते हुए मुस्लिम विरोधी कदमों का विरोध करना चाहते हैं तो दोनों बातें एक साथ संभव नहीं हैं। उन्हें साफ करना होगा कि वे भाजपा के साथ हैं या उसके खिलाफ।"
उन्होंने कहा कि एनसीपीआई के भीतर इस मुद्दे पर भ्रम की स्थिति है और उसे पार्टी को ही दूर करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री निश्चित रूप से सहयोगी दलों की संख्या कम नहीं होने देना चाहेंगे लेकिन फैसला संबंधित सांसदों को करना होगा।
एनसीपीआई सांसद यूसुफ पठान के एनडीए बैठक से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सौगत रॉय ने कहा कि देश में 543 सांसद हैं और राष्ट्रीय हित की चिंता केवल तीन सांसदों को ही नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी दल को अपना रुख स्पष्ट रखना चाहिए और एक साथ दोनों पक्षों में रहने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
इस बीच एनसीपीआई सांसद खलीलुर रहमान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद बताया कि उन्होंने मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से जुड़े दो मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि पहला मुद्दा उन लोगों का था जिनके नाम मतदाता सूची से हट गए हैं और जिनकी अपील ट्रिब्यूनल में लंबित है। उन्होंने गृह मंत्री से अपील की कि इन मामलों की सुनवाई जल्द कराई जाए ताकि पात्र लोगों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल हो सकें।
खलीलुर रहमान ने बताया कि दूसरा मुद्दा धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल का था। उन्होंने कहा कि मस्जिद, मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर का उपयोग सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए। उनके मुताबिक, गृह मंत्री ने दोनों मुद्दों पर विचार करने का आश्वासन दिया। जब उनसे दोबारा पूछा गया कि क्या वे एनडीए की बैठक में शामिल होंगे तो उन्होंने केवल इतना कहा कि इस विषय पर उनका पहले दिया गया रुख ही कायम है।