
Nepal Flash Flood: नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई बाढ़ से नेपाल-चीन बॉर्डर के पास के इलाकों में पानी के साथ कीचड़ और मलबे के तेज बहाव ने जमकर तबाही मचाई। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों ने भागकर जान बचाई। इस आपदा में अब तक 175 लोगों की मौत होने और 476 विदेशी नागरिकों समेत कई स्थानीय लोगों के लापता होने की खबर है। वहीं मृतकों की संख्या में और बढ़ोतरी होने की आशंका है।
नेपाल में आई बाढ़ का एक और डरावना वीडियो सामने आया है। यह तस्वीर नेपाल-चीन बॉर्डर के पास चीन-अधिकृत तिब्बत के इमिग्रेशन सेंटर पोर्ट के एक अलग सीसीटीवी वीडियो में दिखाई दी, जिसमें बाढ़ की विनाशकारी भयावहता नजर आई। कीचड़ और मलबे की एक बड़ी लहर इमारत की खिड़कियों के पास से गुजरते हुए कुछ ही पलों में आसपास के इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करती नजर आई। सीसीटीवी फुटेज में लोग मौके से भागते नजर आए।
नेपाल पुलिस ने 157 मौतों की जानकारी दी, जबकि चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV ने कहा कि तिब्बत के ग्यरोंग काउंटी में तीन लोगों की मौत हुई और 265 लोग लापता हैं। इस आपदा में सैकड़ों विदेशी नागरिक भी लापता हो गए हैं।
नेपाल में आई बाढ़ को लेकर प्रारंभिक जांच में आपदा को भूकंप से जुड़ा माना गया, क्योंकि नेपाल-चीन बॉर्डर के पास बीते दिनों भूकंपीय गतिविधि देखी गई थी। लेकिन US जियोलॉजिकल सर्वे ने भूकंप की संभावना को खारिज कर दिया और कहा कि भूकंपीय गतिविधि 5.2 तीव्रता वाले ग्लेशियर के ढहने के कारण हुई थी। ग्लेशियर के ढहने से बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर बहने लगा, जिससे पानी के अचानक तेज बहाव ने निचले इलाकों की घाटियों में जमकर तबाही मचाई।
सैटेलाइट तस्वीरों और जलवायु शोधकर्ताओं के आकलन के अनुसार, ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों का खिसकना (एवलांच) ही शायद इस घटना की मुख्य वजह थी। 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट' के शोधकर्ताओं ने बताया कि त्रिशूली नदी का जलस्तर सिर्फ आधे घंटे में 9 मीटर तक बढ़ने से आपदा की तीव्रता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
नेपाल में आई बाढ़ में 47 अमेरिकी, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 24 कनाडाई नागरिक भी लापता बताए गए हैं। हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड के अनुसार, रसुवा के गोसाईंकुंड झील इलाके में ट्रेकिंग के बाद लापता लोगों में 62 नेपाली नागरिक और 28 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। नेपाली अधिकारियों ने बताया कि 403 लोग लापता हैं, जिनमें 341 विदेशी शामिल हैं। इनमें माउंट कैलाश की यात्रा कर रहे 133 भारतीय भी शामिल हैं।