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Infrastructure Projects: 3.41 लाख करोड़ बढ़ी लागत, देरी में सड़क और रेल मंत्रालय सबसे आगे

Cabinet Reshuffle की अटकलों के बीच एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या परफॉर्मेंस के आधार पर भी पीएम नरेंद्र मोदी मंत्रियों को हटाएंगे? दूसरा सवाल यह है कि क्या परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में नाकामी को मंत्री का खराब परफॉर्मेंस माना जाएगा? अगर ऐसा हुआ तो कौन मंत्री जा सकते हैं, इसका अंदाज यह रिपोर्ट पढ़ कर आप लगा सकते हैं।
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delay in projects increasing cost PM Narendra Modi concerned, Nitin Gadkari, Ashwani Vaishnav

37.11 लाख करोड़ के 1775 में से 1183 प्रोजेक्ट्स नितिन गडकरी और अश्विनी वैष्णव के मंत्रालयों में ही चल रहे हैं। (Imaging by AI)

Infrastructure Projects पूरे होने में देरी गंभीर समस्या का रूप ले रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 30000 करोड़ की नौ परियोजनाओं की समीक्षा की और कहा कि परियोजनाओं के समय से पूरा न होने का नुकसान आर्थिक से इतर भी है। उन्होंने गुणवत्ता से समझौता किए बिना समय पर निर्माण पूरा करने की जरूरत बताई। लेकिन, ये दोनों ही बातें लंबे समय से अमल में नहीं आ पा रही हैं। परियोजनाओं में देरी का हाल 2024 में भी बीच के उतार-चढ़ाव के साथ 2004 के लेवल पर ही था।

सबसे ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भी देश में चल रहे 1775 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत बीते वर्षों में करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये बढ़ गई है। इनकी मूल लागत 33.7 लाख करोड़ थी, जो जुलाई 2026 तक बढ़ कर 37.11 लाख करोड़ हो चुकी है। 3.41 लाख करोड़ रुपये ज्यादा!अगर इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने में और देरी हुई तो यह लागत और बढ़ सकती है।

ये वे प्रोजेक्ट्स हैं, जिनकी निगरानी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के PAIMANA पोर्टल के द्वारा की जाती है। ये प्रोजेक्ट्स केंद्र सरकार के 17 मंत्रालयों या विभागों के द्वारा चलाए जा रहे हैं। इनमें से 735 मेगा प्रोजेक्ट (1000 करोड़ से ऊपर) की श्रेणी में आते हैं।

प्रोजेक्ट की देरी में नितिन गडकरी और अश्विनी वैष्णव का मंत्रालय नंबर 1 और 2

सरकारी प्रेस रिलीज में दी गई जानकारी के मुताबिक 1755 में से 9.62 लाख करोड़ के 993 प्रोजेक्ट्स अकेले सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के हैं। यह मंत्रालय 2014 से लगातार नितिन गडकरी के पास है।

दूसरे नंबर पर रेल मंत्रालय है, जिसके मंत्री अश्विनी वैष्णव हैं। वह 2021 से रेल मंत्री हैं। रेल मंत्रालय 6.38 लाख करोड़ के 190 प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।

1755 में से केवल 675 प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं जिनका 81 से 100 फीसदी काम पूरा हो सका है। प्रोजेक्ट में देरी और इसकी वजह से लागत का बढ़ना आम समस्या बन चुकी है। यह समस्या नई भी नहीं है। फिर भी इसका समाधान नहीं हो पा रहा है।

जुलाई 2023 की रिपोर्ट पर भी नजर डालें तो यही समस्या थी। उस रिपोर्ट के मुताबिक समय से पूरा नहीं होने वाले रेलेवे के प्रोजेक्ट्स की संख्या एक साल में 56 से 98 हो गई थी। प्रोजेक्ट्स पूरा होने में देरी के मामले में रेलवे दूसरे और सड़क परिवहन मंत्रालय पहले नंबर पर तब भी बने हुए थे। तब जिन 1646 प्रोजेक्ट्स की रिपोर्ट दी गई थी, उनमें से 809 देरी से चल रहे थे। कुल प्रोजेक्ट्स में से 148 रेलवे के थे, जिनमें से 98 के पूरा होने की समय सीमा खत्म हो चुकी थी। उनमें से कई प्रोजेक्ट्स अभी भी अधूरे हैं।

37.11 लाख करोड़ के 1775 प्रोजेक्ट्स में किस मंत्रालय के कितने

क्र. सं.मंत्रालय/विभागपरियोजनाओं की संख्यासंशोधित लागत (₹ लाख करोड़)जुलाई 2026 तक हुआ कुल खर्च (₹ लाख करोड़)
1सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय9939.624.61
2रेल मंत्रालय1906.384.59
3कोयला मंत्रालय1212.220.60
4पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय1034.232.28
5विद्युत मंत्रालय986.082.10
6आवास और शहरी मामले मंत्रालय503.781.97
7जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग382.011.42
8स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय350.260.11
9दूरसंचार विभाग311.341.03
10उच्च शिक्षा विभाग300.150.09
11इस्पात मंत्रालय270.300.13
12नागरिक उड्डयन मंत्रालय250.230.12
13उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT)120.210.02
14श्रम एवं रोजगार मंत्रालय90.020.01
15बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय60.140.10
16खान मंत्रालय60.120.07
17खेल विभाग10.010.01
कुल योग (Grand Total)177537.1119.26

मोदी सरकार का कहना है कि उसने रेलवे का बजट 2026-27 में 2.78 लाख करोड़ रुपये कर दिया है, जो 2014-15 में महज 32000 करोड़ रुपये ही था। मतलब 12 साल में रेलवे का बजट 2.46 लाख करोड़ बढ़ गया, लेकिन बजट का बड़ा हिस्सा देरी के चलते पुराने प्रोजेक्ट की बढ़ी लागत की भरपाई करने में चला जाएगा। एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत 1.1 लाख करोड़ बढ़ कर 2.1 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई है।

2810 करोड़ की जो श्रीकाकुलम अंजुल गैस पाइपलाइन परियोजना जुलाई 2026 में पूरी हुई है, सदन में सरकार के जवाब के मुताबिक उसे जुलाई 2022 में पूरा होना था।

मार्च 2024 की सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 150 करोड़ रुपये से ज्यादा वाले 41.6 फीसदी प्रोजेक्ट्स देरी से चल रहे थे। मार्च 2019 में यह आंकड़ा 27.1 प्रतिशत था, जो मार्च 2023 में 56.7 फीसदी पर पहुंच गया था। यह आंकड़ा 2004 के बाद सबसे ज्यादा था। 2004 से 2024 तक देरी से चलने वाले प्रोजेक्ट्स का प्रतिशत इस टेबल में देख सकते हैं।

वर्षदेरी से चल रही परियोजनाएं (प्रतिशत में)
200441.4
200538.3
200634.6
200733.9
200847.2
200950.7
201051.8
201147.3
201247.7
201351.1
201429.4
201543.7
201631.9
201726.6
201819.3
201927.1
202031.4
202132.1
202242.1
202356.7
202441.6

(यह आंकड़ा सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की जानकारी के आधार पर है। 2010 से पहले के आंकड़े में सौ करोड़ और उसके बाद के आंकड़ों में 150 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं को रखा गया है।)

कुछ बड़ी परियोजनाएं, जिनका लोगों के जीवन पर बड़ा असर पड़ा

परियोजना का नामवर्षक्या बदलाव आया
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी टनल2017जम्मू और श्रीनगर के बीच 9 किमी की बारहमासी सुरंग, जिससे यात्रा समय में लगभग 2 घंटे की कमी आई।
अटल टनल2020मनाली और लाहौल-स्पीति को जोड़ने वाली 10,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग (9.02 किमी)।
कोच्चि वाटर मेट्रो2021भारत की पहली वाटर मेट्रो प्रणाली, जिसकी पहली बोट दिसंबर 2021 में लॉन्च की गई।
सुदर्शन सेतु2024ओखा को बेट द्वारका (गुजरात) से जोड़ने वाला 2.32 किमी लंबा पुल।
कोलकाता अंडरवाटर मेट्रो टनल2024भारत की पहली जलमग्न (अंडरवाटर) मेट्रो सुरंग का परिचालन शुरू।
चिनाब ब्रिज2025दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज (चिनाब नदी से 359 मीटर ऊपर), 1,315 मीटर का स्टील ढांचा जो जम्मू-श्रीनगर कनेक्टिविटी को मजबूत करता है।
अंजी खड्ड ब्रिज2025जम्मू और कश्मीर में स्थित भारत का पहला केबल-स्टेयड (cable-stayed) रेलवे ब्रिज।
पंबन ब्रिज2025रामेश्वरम को मुख्य भूमि से जोड़ने वाला भारत का पहला वर्टिकल-लिफ्ट रेलवे सी ब्रिज (2.07 किमी लंबा, 72.5 मीटर वर्टिकल लिफ्ट स्पैन के साथ)।
जेड-मोड़ / सोनमर्ग टनल2025जम्मू-कश्मीर के हिमस्खलन-प्रवण क्षेत्र में बारहमासी पहुंच प्रदान करने वाली 12 किमी की सुरंग, जिससे लद्दाख की ओर आवाजाही में सुधार हुआ।