भारत के खगोल प्रेमियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। जल्द ही उन्हें आसमान में कुछ ऐसा दिखाई देगा जो शायद उन्होंने पहले कभी नहीं देखा होगा।
भारत के खगोल प्रेमियों के लिए बड़ी खबर है! एक नया धूमकेतु, जिसे 'सी/2026 ए1 (एमएपीएस)' नाम दिया गया है, जल्द ही रात के आकाश को अपनी चमक से सराबोर करने वाला है। अप्रैल के पहले सप्ताह खासतौर पर 4-5 अप्रेल को यह सूर्य के सबसे करीब होगा। अगर यह सूर्य की गर्मी से जलकर नष्ट नहीं हुआ, तो यह दिन के उजाले में भी दिखाई दे सकता है। अनुमान है कि इसकी चमक हमारे सौरमंडल के सबसे चमकीले ग्रह 'शुक्र' को भी फीकी कर सकती है। चिली, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में इसका सबसे शानदार नज़ारा दिखेगा।
भारत में यह धूमकेतु दक्षिण भारत और उत्तर भारत के कई राज्यों में दिखेगा। इनमें केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं, जहाँ के लोग इसके सबसे शानदार नज़ारे देख पाएंगे। यहाँ यह सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। वहीं दिल्ली, राजस्थान और हिमालयी क्षेत्रों में यह क्षितिज के काफी नीचे रहेगा, जिससे इसे देखने के लिए किसी ऊंची इमारत या प्रदूषण मुक्त खुले मैदान का रुख करना पड़ सकता है।
13 जनवरी 2026 को इस धूमकेतु को चिली में फ्रांसीसी खगोलविदों के एक समूह ने खोजा था। यह 'क्रेत्ज सनगेज़र' परिवार का सदस्य है। 'सनगेज़र' उन धूमकेतुओं को कहते हैं जो सूर्य के बहुत करीब से गुज़रते हैं। ऐसे धूमकेतु जब सूर्य के पास पहुंचते हैं, तो उसकी प्रचंड गर्मी इनकी बर्फ को सीधे गैस में बदल देती है, जिससे एक मीलों लंबी और बेहद चमकदार पूंछ बनती है।