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लोकसभा परिसीमन पर नया फॉर्मूला: 543 से 824 सीटों का प्रस्ताव, उत्तर-दक्षिण संतुलन साधने की कोशिश

Lok Sabha Delimitation: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के वर्किंग पेपर में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 824 करने का प्रस्ताव दिया गया है। मॉडल में 373 सीटें यथावत रखने और 170 सीटों को विभाजित कर 281 नई सीटें बनाने की बात कही गई है, ताकि परिसीमन में उत्तर-दक्षिण संतुलन बना रहे।
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Jun 25, 2026
New Formula for Lok Sabha Delimitation
लोकसभा(फोटो-ANI)

Lok Sabha: लोकसभा सीटों के परिसीमन और उसमें उत्तर-दक्षिण में संतुलन की चुनौती के बीच प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के एक वर्किंग पेपर ने नया मॉडल पेश किया है। इसके तहत लोकसभा सीटों में की संख्या में तो करीब 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव दिया है लेकिन कहा गया है कि संख्या बढ़ाने के बावजूद 543 मौजूदा लोकसभा सीटों में से 373 सीटों को बिना किसी बदलाव के यथावत रखा जाए और केवल 170 सीटों को दो या तीन हिस्सों में विभाजित कर लोकसभा की कुल संख्या 824तक पहुंचाई जा सकती है। इससे हर बड़े राज्य को अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिलेगा, लेकिन परिसीमन का वास्तविक असर देश की केवल एक-तिहाई सीटों तक ही सीमित रहेगा। यह वर्किंग पेपर ईएसी-पीएम की सदस्य डॉ.शमिका रवि और भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आइएसआइ) के प्रो.मुदित कपूर ने तैयार किया है। डाॅ.रवि को हाल ही प्रधानमंत्री ने डेमोग्राफी चेंज कमेटी का सदस्य भी नियुक्त किया है। वर्किंग पेपर में मौजूदा 59 सीटों को दो हिस्सों और 111 सीटों को तीन हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव है। इससे कुल 281नई सीटें सृजित होंगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि सीटों के विभाजन का आधार केवल जनसंख्या नहीं बल्कि अन्य कुछ मानक रखे गए हैं। इस संबंध में ईएसी-पीएम ने एक्स पर जानकारी भी दी है।

राजस्थान-एमपी में 77-, छत्तीसगढ़ में 3 सीटों का विभाजन


रिपोर्ट के साथ जारी किए गए नक्शे से संकेत हैं कि मध्य भारत के ग्रामीण हिंदी भाषी राज्यों में अपेक्षाकृत कम बदलाव प्रस्तावित हैं। इसके विपरीत महानगरीय और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में दो और तीन हिस्सों में विभाजन की सिफारिश अधिक दिखाई देती है। पेपर में सबसे बड़ी बात यही है कि यह बड़े क्षेत्रफल वाली सीटों को स्वत: विभाजन योग्य नहीं मानती। इसके बजाय उन संसदीय क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है जहां मतदाताओं की संख्या अधिक है, सामाजिक संरचना जटिल है और शहरीकरण का स्तर ऊंचा है।

उत्तर-दक्षिण विवाद का समाधान


परिसीमन से दक्षिणी राज्यों को नुकसान की आशंका के बीच वर्किंग पेपर में दावा किया गया है प्रस्तावित मॉडल में लगभग सभी बड़े राज्यों के प्रतिनिधित्व में ज्यादा बदलाव नहीं होगा। नए मॉडल में दक्षिणी राज्यों तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल की लोकसभा में कुल हिस्सेदारी 23.7 प्रतिशत से मामूली घटकर 23.6% हो जाएगी। साथ ही उत्तर भारत के राज्यों, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 45.6 प्रतिशत से घटकर 45.2 प्रतिशत हो जाएगी।

केवल जनसंख्या नहीं, ये भी कारक


रिपोर्ट में 2009–2024 के लोकसभा चुनाव का डेटा लेकर यह अध्ययन किया कि मतदान प्रतिशत किन कारकों से प्रभावित होता है। प्रस्तावित मॉडल में इन कारकों को परिसीमन का आधार बनाया गया है।

  1. संसदीय क्षेत्र का आकार, 2.शहरीकरण, 3. एससी आबादी, 4. एसटी आबादी, 5.भाषाई विविधता, 6.मतदान केंद्रों की उपलब्धता

ऐसे बदलाव की सिफारिश


राजस्थान: सीटों की संख्या- 25 से बढ़कर 38

इन सीटों को तोड़कर नई 13 सीटें: जयपुर, जयपुर ग्रामीण, सीकर, जोधपुर, उदयपुर, चूरू और बांसवाड़ा

मध्यप्रदेश: सीटों की संख्या - 29 से बढ़कर 44

इन सीटों को तोड़कर नई 15 सीटें: रतलाम, धार, इंदौर, भोपाल, बालाघाट, मंडला, ग्वालियर, भिंड
छत्तीसगढ़: सीटों की संख्या- 11 से बढ़कर 17
इन सीटों को तोड़कर नई 6 सीटें: सरगुजा, कांकेर और दुर्ग

रिपोर्ट की अन्य खास बातें

  • परिसीमन 2027 की जनगणना के आंकड़ों से हो
  • सभी बड़े राज्यों की सीटों में करीब 50त्न वृद्धि का सुझाव
  • 170 मौजूदा लोकसभा क्षेत्रों को विभाजित कर 281 सीटें बनें
  • मिजोरम, सिक्किम, पुडुचेरी, लद्दाख, अंडमान-निकोबार, नागालैंड, चंडीगढ़ और लक्षद्वीप जैसे छोटे राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की सीटें दोगुनी करने का सुझाव।
  • परिसीमन के बाद मतदान में 2.3त्न वृद्धि का अनुमान
Published on:
25 Jun 2026 05:13 am