
NIA Investigation in Malappuram: केरल के मलप्पुरम में अवैध बारूद की विशाल खेप बरामदगी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ा प्रहार करते हुए मुख्य साजिशकर्ता हारिस टीए को गिरफ्तार कर लिया है। इस अहम गिरफ्तारी के साथ ही मामले में अब तक सलाखों के पीछे पहुंचे आरोपियों की संख्या 10 हो गई है। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि अवैध विस्फोटकों की खरीद-फरोख्त केवल स्थानीय स्तर का अपराध नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिए एक बड़ा अंतरराज्यीय खतरा है।
मंजेरी से दबोचा गया मुख्य सूत्रधार राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने गुप्त सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर कार्रवाई करते हुए मलप्पुरम के मंजेरी इलाके से हारिस टीए को हिरासत में लिया। एजेंसी के अनुसार, हारिस इस पूरे गैरकानूनी नेटवर्क का मुख्य रणनीतिकार है, जिसने विस्फोटक सामग्री की अवैध खरीद और उसे ठिकाने लगाने में केंद्रीय भूमिका निभाई थी। बिना किसी वैधानिक लाइसेंस और अनुमति के इतनी बड़ी तादाद में संवेदनशील सामग्री जुटाने के पीछे उसका क्या मकसद था, एजेंसी अब इसकी गहन कड़ियां जोड़ रही है।
फरवरी 2026 में हुआ था सनसनीखेज भंडाफोड़ इस पूरे मामले की शुरुआत 7 फरवरी 2026 को हुई थी, जब केरल पुलिस ने मलप्पुरम के चेम्माड-थलप्पारा रोड स्थित 'फरहा हॉलो ब्रिक्स कंपनी' के परिसर में खड़ी एक संदिग्ध लॉरी को घेराबंदी कर पकड़ा था। तलाशी के दौरान वाहन से 89,600 विस्फोटक छड़ें (Explosive Sticks) और 10,500 शॉक ट्यूब (NONEL) बरामद की गई थीं। मौके से पुलिस ने शुरुआती तौर पर तीन संदिग्धों को दबोचा था। बारूद का यह जखीरा किसी भी बड़े औद्योगिक या आतंकी ढांचे को दहलाने के लिए पर्याप्त था।
तीन राज्यों में NIA की ताबड़तोड़ छापेमारी मामले की गंभीरता और अंतरराज्यीय कड़ियों को देखते हुए NIA ने अप्रैल 2026 में नए सिरे से मामला दर्ज कर जांच की कमान संभाली। जांच का दायरा बढ़ाते हुए एजेंसी ने केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के 19 अलग-अलग ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अतिरिक्त जिलेटिन की छड़ें जब्त की गईं, जिनसे बारूद के इस काले कारोबार के तार कई राज्यों में फैले होने के पुख्ता सबूत मिले।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि विस्फोटकों से लदी लॉरी चेम्माड इलाके में पहुंची थी। पुलिस को सूचना मिलने के बाद कार्रवाई की गई और बड़ी खेप बरामद हुई। इस मामले में शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने जांच की और कई गिरफ्तारियां कीं।
बाद में विस्फोटकों की मात्रा और पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए NIA ने अप्रैल 2026 में जांच अपने हाथ में ले ली। एजेंसी ने मामले को अपनी विशेष अदालत में ले जाने की प्रक्रिया भी शुरू की।
विशेषज्ञों के मुताबिक, दक्षिण भारत में अक्सर अवैध खनन, पत्थर खदानों और गैरकानूनी गतिविधियों के लिए बिना लाइसेंस वाले विस्फोटकों की तस्करी की जाती है। हालांकि, इतनी बड़ी तादाद में डेटोनेटर और नॉन-इलेक्ट्रिक शॉक ट्यूब (NONEL) की बरामदगी सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि इनका इस्तेमाल विध्वंसक गतिविधियों में भी किया जा सकता है।
एनआईए अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या इस सिंडिकेट का संबंध किसी राष्ट्रविरोधी गिरोह या संगठित अपराध तंत्र से तो नहीं था। हारिस की गिरफ्तारी से इस नेटवर्क के अंतिम छोर तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।