राष्ट्रीय

‘मैं एक दिन CM बनूंगा’… जानें कैसे कॉफी हाउस पर ताल ठोकने वाले नीतीश बन गए बिहार के सुशासन बाबू

राज्यसभा नामांकन के साथ नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के सक्रिय बिहार राजनीति से हटने की चर्चा तेज, लेकिन उनका लंबा राजनीतिक सफर और मुख्यमंत्री के रूप में प्रभाव हमेशा याद किया जाएगा।

2 min read
Mar 07, 2026
Nitish Kumar

बिहार (Bihar) की राजनीति में पिछले कुछ ही दिनों में कई बड़े बदलाव देखने को मिले। दशकों तक राज्य की सत्ता संभालने वाले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने अचानक राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करके सभी को हैरान कर दिया। इस फैसले से जहां एक तरफ उनके समर्थक काफी दुखी हुए वहीं दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों ने इसे भाजपा की चाल बताया। इसके बाद नीतीश ने इस मामले पर बयान जारी करते हुए इसे अपनी इच्छा बताया और कहा कि वह राज्य की सरकार का हमेशा समर्थन करेंगे। इसी के साथ नीतीश का बिहार की राजनीति से एक्टिव रोल खत्म होने जा रहा है लेकिन जब भी राज्य की राजनीति का जिक्र होगा उसमें नीतीश का नाम सबसे मजबूत खिलाड़ी के तौर पर लिया जाएगा।

ये भी पढ़ें

शादी में 22 हजार का दहेज मिलने पर तमतमा गए थे नीतीश कुमार, जानें फिर कैसे सुलझा मामला

कर्पूरी ठाकुर को लेकर चल रही थी बहस

नीतीश ने अपने शुरूआती दौर में कई बार चुनावों में हार का सामना किया लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उस दौर में भी नीतीश को विश्वास था कि एक दिन वह बिहार के मुख्यमंत्री जरूर बनेंगे। बात 1977 के दौर की है जब जनता दल ने कांग्रेस को चुनावों में कड़ी टक्कर दी थी। नीतीश यह चुनाव हार गए थे और उन दिनों वह पटना के इंडिया कॉफी हाउस में अपने साथियों के साथ बैठा करते थे। एक दिन यहां उनकी पत्रकार सुरेंद्र किशोर से कोई चर्चा चल रही थी और दोनों कर्पूरी ठाकुर को लेकर बहस कर रहे थे। चर्चा का मुद्दा सिर्फ यह था कि क्य ठाकुर को सीएम बनाना सही है या नहीं।

टेबल पर हाथ मारकर सत्ता पाने का किया दावा

उन दिनों ठाकुर की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इसी दौरान नीतीश अचानक गुस्सा होकर उठे और टेबल पर हाथ मारते हुए उन्होंने कहा कि मैं सत्ता प्राप्त करूंगा, फिर चाहे साम-दाम-दंड-भेद के जरिए, लेकिन सत्ता पाकर अच्छा काम करूगा। नीतीश ने जब यह बात कही तब शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि एक दिन वह सच में बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे और फिर दशकों तक वह सीएम की कुर्सी पर राज करेंगे। यह नीतीश का आत्मविश्वास ही था जिसनें उन्हें एक विधायक से राज्य के सीएम पद तक पहुंचाया और सिर्फ एक या दो बार नहीं बल्कि उन्होंने दस बार राज्य की सत्ता संभाली। किश्मत और मेहनत के साथ इंसान अपनी कहानी अपने अंदाज में लिख सकता है और सालों तक वह लोगों के लिए एक उदाहरण बनी रहती है, नीतीश इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है।

Published on:
07 Mar 2026 04:11 pm
Also Read
View All

अगली खबर