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ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव! कैसे हटाते हैं लोकसभा स्पीकर, कितने सदस्यों का वोट जरूरी?

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 और 96 के तहत स्पीकर को हटाने की एक विशेष प्रक्रिया होती है, जिसमें 14 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य है।

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Feb 09, 2026
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला

No-confidence motion against Om Birla: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक, अविश्वास प्रस्ताव (नो-कॉन्फिडेंस मोशन) लाने की तेज तैयारी में हैं। मुख्य आरोप हैं कि स्पीकर पक्षपाती रवैया अपना रहे हैं। बजट सत्र के पहले सप्ताह में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई। स्पीकर ने कांग्रेस के सात सांसदों सहित कुल आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ कार्रवाई न करने, कांग्रेस की महिला सांसदों पर बेबुनियाद आरोप लगाने और सदन की कार्यवाही में एकतरफा रुख अपनाने के आरोप भी लगे हैं। पिछले सप्ताह कई बार सदन स्थगित हुआ, जहां विपक्ष ने पूर्व सेना प्रमुख के संस्मरणों से जुड़े भारत-चीन संघर्ष 2020 पर सरकार से जवाब मांगने के लिए विरोध किया।

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इंडिया ब्लॉक की बैठक

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में इंडिया ब्लॉक की बैठक हुई, जहां स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर गहन चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है। द हिन्दू की रिपोर्ट में कहा गया कि विपक्ष जल्द नोटिस देने वाला है। यह कदम सदन में स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और राजनीतिक संदेश देने का प्रयास है।

स्पीकर हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया

  • लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा नियमों (रूल 200 आदि) के तहत तय है। इसे 'अविश्वास प्रस्ताव' नहीं, बल्कि 'स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव' (resolution for removal of Speaker) कहा जाता है।
  • प्रस्ताव की लिखित सूचना कम से कम 14 दिन पहले लोकसभा महासचिव को देनी होती है।
  • नोटिस पर कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। बिना 50 समर्थन के प्रस्ताव स्वीकार नहीं होता।
  • नोटिस स्वीकार होने पर स्पीकर चर्चा के लिए दिन तय करते हैं, जो 10 दिन से अधिक नहीं हो सकता।
  • चर्चा के दौरान स्पीकर कुर्सी पर नहीं बैठते; डिप्टी स्पीकर कार्यवाही संभालते हैं।
  • मतदान में साधारण बहुमत (मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों का 50% +1) पर्याप्त है। विशेष बहुमत (2/3) की जरूरत नहीं।
  • प्रस्ताव पास होने पर स्पीकर तुरंत पद से हट जाता है, लेकिन सांसद बना रहता है। उसके बाद नया स्पीकर चुना जाता है।

लोकसभा अध्यक्ष को हटाना इतना आसान नहीं!

लोकसभा के इतिहास में कभी स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सफल नहीं हुआ। अब तक ऐसे तीन प्रस्ताव आए, लेकिन सभी असफल रहे। वर्तमान लोकसभा में NDA के पास मजबूत बहुमत है, इसलिए प्रस्ताव पास होने की संभावना कम है, लेकिन विपक्ष इसे स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और सदन की कार्यवाही में बदलाव की मांग के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। यदि विपक्ष 50 से ज्यादा सांसदों का समर्थन जुटा लेता है, तो प्रस्ताव सदन में चर्चा के लिए आएगा। यह बजट सत्र में राजनीतिक ड्रामा बढ़ा सकता है।

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Updated on:
09 Feb 2026 10:16 pm
Published on:
09 Feb 2026 09:15 pm
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