सरकार इंटरस्टेट वाहन ट्रांसफर को आसान बनाने के लिए NOC नियम हटाने पर विचार कर रही है। VAHAN डिजिटल डेटा के जरिये स्वत क्लियरेंस सिस्टम लागू हुआ तो वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
भारत में एक राज्य से दूसरे राज्य में वाहन ले जाना अब तक काफी जटिल प्रक्रिया माना जाता रहा है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय यानी रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस की मंजूरी और कई दस्तावेजों के कारण लोगों को लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। अब सरकार इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है और संभव है कि वाहन ट्रांसफर के लिए जरूरी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी NOC की अनिवार्यता खत्म कर दी जाए। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो इंटरस्टेट वाहन ट्रांसफर ज्यादा तेज, पारदर्शी और आसान हो सकता है।
अभी किसी भी वाहन को दूसरे राज्य में दोबारा रजिस्टर कराने के लिए पुराने राज्य के रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस से NOC लेना अनिवार्य होता है। यह प्रमाण पत्र बताता है कि वाहन पर कोई रोड टैक्स बकाया, चालान या अन्य देनदारी लंबित नहीं है। वाहन मालिक को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, फिटनेस सर्टिफिकेट और टैक्स रसीद जैसे दस्तावेज भी जमा करने पड़ते हैं। कई बार अलग अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने और कागजी जांच के कारण यह प्रक्रिया हफ्तों तक खिंच जाती है।
नीति आयोग यानी नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (NITI Aayog) की ओर से गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने इस NOC नियम को समाप्त करने की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि मौजूदा डिजिटल डेटा सिस्टम का उपयोग करके वाहन से जुड़ी सभी जानकारी स्वत जांची जा सकती है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार अगर ऑटो क्लियरेंस व्यवस्था लागू होती है तो राज्यों के बीच वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया काफी सरल बन सकती है।
भारत में अधिकतर वाहनों का डेटा पहले से ही केंद्रीकृत VAHAN प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जिसे देशभर के परिवहन विभाग एक्सेस कर सकते हैं। इस डिजिटल डेटाबेस के जरिये किसी भी वाहन पर लंबित टैक्स, चालान या कानूनी स्थिति तुरंत देखी जा सकती है। यदि NOC की जरूरत खत्म होती है तो इसी सिस्टम के माध्यम से स्वत सत्यापन संभव होगा। इससे वाहन मालिकों, फ्लीट ऑपरेटर और यूज्ड कार बाजार को बड़ी सुविधा मिल सकती है।