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वोटर लिस्ट से 9.8 लाख नाम गायब होने की आशंका! ओडिशा में चुनाव से पहले यह क्या हुआ

Revision : ओडिशा में 2026 के मतदाता सूची संशोधन से पहले बीजेडी सांसद सस्मित पात्रा ने चुनाव आयोग से पारदर्शी प्रक्रिया की मांग की है। उन्होंने 9.8 लाख वोटरों के नाम कटने की आशंका जताते हुए सख्त वेरिफिकेशन की अपील की है।

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May 14, 2026
बीजेडी सांसद सस्मित पात्रा। (फोटो: ANI)

Election Commission : ओडिशा में साल 2026 के लिए मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। लेकिन इस प्रक्रिया के शुरू होने से पहले ही राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बीजू जनता दल के वरिष्ठ सांसद सस्मित पात्रा ने चुनाव आयोग से अपील की है कि ओडिशा में मतदाता सूची को अपडेट करने का काम पूरी तरह से पारदर्शी और बिना किसी गड़बड़ी के होना चाहिए। उन्हें डर है कि इस प्रक्रिया में लाखों असली वोटरों के नाम कट सकते हैं।

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9.8 लाख मतदाताओं के नाम कटने का डर

बीजेडी सांसद सस्मित पात्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने जुलाई 2026 से शुरू होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण अभ्यास को लेकर गहरी चिंता जताई है। पात्रा का कहना है कि शुरुआती जांच (प्री-एसआईआर) के दौरान ही लगभग 9.8 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात सामने आई थी। उनका मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नामों का कटना किसी बड़ी तकनीकी या जमीनी खामी का संकेत हो सकता है। बीजेडी ने मांग की है कि किसी भी असली वोटर का नाम लिस्ट से बाहर नहीं होना चाहिए और इसके लिए जमीनी स्तर पर सख्त वेरिफिकेशन किया जाए।

ओडिशा में 3.34 करोड़ वोटरों पर फोकस

चुनाव आयोग ने हाल ही में देश के 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में 36 करोड़ से अधिक मतदाताओं को शामिल करते हुए इस पुनरीक्षण अभियान (फेज-3) की घोषणा की है। इसमें ओडिशा को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। ओडिशा में करीब 3.34 करोड़ मतदाता हैं। इतनी बड़ी आबादी के लिए राज्य में 38,123 बूथ लेवल अधिकारी और 8,391 बूथ लेवल एजेंट तैनात किए जाएंगे। पात्रा ने चुनाव आयोग को याद दिलाया कि इस बड़े पैमाने के काम में पारदर्शिता सबसे जरूरी है, ताकि आम नागरिकों को शिकायत का मौका न मिले।

कुछ राज्यों को फिलहाल रखा गया बाहर

चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि फिलहाल हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में यह अभियान शुरू नहीं होगा। वहां के दुर्गम इलाकों, बर्फीले मौसम और जनगणना के दूसरे चरण के पूरे होने का इंतजार किया जा रहा है। इन राज्यों के लिए बाद में अलग से शेड्यूल जारी किया जाएगा।

बीजेडी का यह कदम चुनाव से पहले वोट बैंक सुरक्षित रखने की रणनीति

इस खबर पर स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेडी का यह कदम चुनाव से पहले अपने वोट बैंक को सुरक्षित रखने की एक रणनीति है। वहीं, आम जनता में भी अपने वोटिंग अधिकार को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। विपक्षी दल भी अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और बीएलओ की जांच रिपोर्ट पर पैनी नजर रखेंगे।

9.8 लाख मतदाताओं के नाम प्री-एसआईआर में हटाए गए

चुनाव आयोग क्या ओडिशा के लिए किसी विशेष पर्यवेक्षक की नियुक्ति करेगा? इसके अलावा, जिन 9.8 लाख मतदाताओं के नाम प्री-एसआईआर में हटाए गए हैं, क्या उनका दोबारा क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा? आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की ओर से जारी होने वाली गाइडलाइंस पर नजर रहेगी।

यह डेटा का एक बहुत बड़ा घालमेल

बहरहाल यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ मतदाता सूची तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जनगणना के मकान सूचीकरण अभियान के साथ जोड़ा गया है। यह डेटा का एक बहुत बड़ा घालमेल है। अगर जनगणना के डेटा और वोटर लिस्ट के डेटा में अंतर आता है, तो इससे बूथ लेवल पर एक नई प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो सकती है। ( इनपुट: ANI )











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