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अब नागरिकता छीनेगी शुभेन्दु सरकार? मंत्री की एक घोषणा के बाद वोटर लिस्ट से हटाए लोगों में समाया डर

Bengal Voter List: कोलकाता में मतदाता सूची से नाम हटने के बाद लाखों परिवारों में डर और असमंजस बढ़ गया है। अपील लंबित होने पर सरकारी योजनाओं से बाहर किए जाने की आशंका ने नागरिकता और मतदान अधिकार को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
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कोलकाता

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Devika Chatraj

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Updated: 12 May 2026, 9:23 AM IST

Suvendu Adhikari

बंगाल के नए सीएम शुभेंदु अधिकारी। (फोटो- ANI)

Bengal Election 2026: कोलकाता में मतदाता सूची से नाम हटाए गए लाखों लोगों के बीच नई चिंता सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि जिन लोगों की अपील अभी ट्रिब्यूनल में लंबित है, उन्हें अन्नपूर्णा भंडार योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इस बयान के बाद प्रभावित परिवारों में डर बढ़ गया है। कई लोगों को आशंका है कि उन्हें भविष्य में सरकारी योजनाओं और स्थानीय चुनावों से भी बाहर किया जा सकता है। कुछ लोगों ने कहा कि आगे चलकर उनकी नागरिकता पर सवाल उठाए जा सकते हैं।

लाभ योजना पर संकट

पार्क सर्कस की एक महिला, जो लक्ष्मी भंडार योजना की लाभार्थी हैं, ने कहा कि उनका नाम मतदाता सूची से हट गया है जबकि उनके माता पिता और पति का नाम अभी भी दर्ज है। महिला ने कहा कि यदि सरकार उनका लाभ बंद कर देती है तो वह कुछ नहीं कर पाएंगी। मटियाबुर्ज की एक अन्य महिला ने कहा कि वह और उनके पति दोनों अपील कर चुके हैं, लेकिन उन्हें भरोसा नहीं है कि सुनवाई कब होगी।

सरकार और ट्रिब्यूनल पर सवाल

नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि जिन लोगों के नाम हट चुके हैं और जिनकी अपील लंबित है, उन्हें फिलहाल अन्नपूर्णा भंडार योजना से बाहर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि मृत लोगों और भारतीय नागरिक नहीं होने वाले लोगों को लाभ नहीं मिलना चाहिए। राज्य में लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जबकि करीब 7 लाख अपीलें अभी भी लंबित हैं। प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं मिल रही कि ट्रिब्यूनल काम कर रहा है या नहीं।

नागरिकता और चुनाव को लेकर बेचैनी

कई प्रभावित मतदाताओं को डर है कि दिसंबर में होने वाले नगर निकाय चुनाव में भी उन्हें मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा। उत्तरपाडा के हस्ती मलिक ने कहा कि वह 2002 से मतदान कर रहे थे, लेकिन इस बार वोट नहीं डाल सके। उनका कहना है कि असम की तरह यहां भी लोगों से भारतीय होने का प्रमाण मांगा जा सकता है।

TMC का दावा

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि कई सीटों पर हटाए गए मतदाताओं की संख्या और भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवारों की जीत का अंतर लगभग बराबर था। कई परिवारों कहना है कि प्रशासन की चुप्पी से उनकी पहचान और भरोसा कमजोर हो रहा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के वकील गौरव घोष ने भी आशंका जताई कि यही लिस्ट दिसंबर में होने वाले कोलकाता नगर निगम चुनाव में इस्तेमाल हो सकती है।