
जादवपुर यूनिवर्सिटी (फाइल फोटो)
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थिति जादवपुर यूनिवर्सिटी लंबे समय से वामपंथी छात्र और शिक्षक राजनीति का मजबूत केंद्र मानी जाती रही है। हाल के वर्षों में परिसर के भीतर राष्ट्रवाद, छात्र आंदोलन और कथित एंटी नेशनल नारों को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। । इसी बीच सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) समर्थित पश्चिम बंग विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद से जुडे कर्मचारियों ने बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत का जश्न मनाते हुए कैंपस में रैली निकाली। कर्मचारियों ने भगवा झंडे लहराते हुए जय श्री राम औप राष्ट्रबादेर जय होक जैसे नारे लगाए। इस घटनाक्रम को विश्वविद्यालय की बदलती राजनीतिक दिशा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
करीब दोपहर एक बजे शुरू हुई यह रैली आर्ट्स और साइंस विभागों के चौराहे से निकली, जिसे आमतौर पर वाम समर्थित छात्र और शिक्षक संगठनों के प्रदर्शन स्थल के रूप में जाना जाता है। कर्मचारी परिषद से जुडे सदस्य पूरे परिसर में मार्च करते हुए अरविंद भवन पहुंचे, जो विश्वविद्यालय का प्रशासनिक मुख्यालय है। यह कार्यक्रम ऐसे समय हुआ जब तीन दिन पहले अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने भी कैंपस में अपनी मौजूदगी दोहराते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से महत्वपूर्ण फैसलों में उनसे बातचीत करने की मांग की थी। लगातार दो कार्यक्रमों ने संकेत दिया कि विश्वविद्यालय परिसर में वर्षों से प्रभाव रखने वाले वाम समर्थित संगठनों के सामने अब राष्ट्रवादी विचारधारा से जुडे समूह भी खुलकर सक्रिय हो रहे हैं।
अरविंद भवन पहुंचने के बाद कर्मचारी परिषद के नेताओं ने कहा कि वे अलग विचारधारा वाले समूहों के साथ सह अस्तित्व में विश्वास रखते हैं, लेकिन किसी भी एंटी नेशनल गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेंगे। परिषद के राज्य महासचिव पलाश माजी ने कहा कि परिसर में मौजूद एंटी नेशनल ग्राफिटी और नारों को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने ऑपरेशन कगार और आजाद कश्मीर से जुडी दीवार लेखन का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे संदेश विश्वविद्यालय की छवि खराब करते हैं। माजी के अनुसार जादवपुर यूनिवर्सिटी की स्थापना राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरित थी, लेकिन अस्सी के दशक के बाद परिसर में अलग तरह की राजनीति हावी हो गई। उन्होंने कहा कि कैंपस में पुलिस चौकी स्थापित करने और छात्रों के लिए पहचान पत्र रखना अनिवार्य बनाने का भी समर्थन किया जाएगा।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को बारुईपुर की चुनावी सभा में जादवपुर यूनिवर्सिटी को एंटी नेशनल नारों का केंद्र बताया था। इसके बाद से परिसर की राजनीति और अधिक चर्चा में आ गई है। RSS समर्थित संगठनों की हालिया सक्रियता को उसी बहस का विस्तार माना जा रहा है। हालांकि वाम समर्थित छात्र और शिक्षक संगठनों की ओर से अभी तक इस रैली पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विश्वविद्यालय के भीतर वैचारिक संघर्ष के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
Updated on:
12 May 2026 08:57 am
Published on:
12 May 2026 08:53 am
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