Omar Abdullah: सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि ट्रंप सुबह कुछ कहते हैं, दोपहर में कुछ और और शाम को कुछ अलग। उनके बयानों में कोई स्थिरता नहीं है।
US Iran ceasefire 2026: जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर को लेकर प्रतिक्रिया दी है। साथ ही उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर भी बड़ा दावा किया है। सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा नहीं किया जा सकता और शायद उन्हें खुद भी नहीं पता कि वे क्या करने जा रहे हैं।
सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि ट्रंप सुबह कुछ कहते हैं, दोपहर में कुछ और और शाम को कुछ अलग। उनके बयानों में कोई स्थिरता नहीं है।
सीएम उमर अब्दुल्ला ने सीजफायर को लेकर भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर संघर्षविराम हुआ है तो अमेरिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह कायम रहे। अमेरिका को इजरायल को रोकना चाहिए, जो अब भी लेबनान में बमबारी कर रहा है और लोग मारे जा रहे हैं।
वहीं मीडिया से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने सीजफायर में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर कहा कि वह इसे सफलता या असफलता के रूप में नहीं देखना चाहते, लेकिन यह सच है कि पाकिस्तान ने वह किया जो भारत नहीं कर पाया।
उन्होंने कहा कि मेरी व्यक्तिगत राय है कि इजरायल के साथ हमारे करीबी संबंधों की वजह से हम यह भूमिका नहीं निभा पाए, जबकि पहले हमारे अमेरिका और ईरान दोनों से अच्छे संबंध थे।
अब्दुल्ला ने अंत में कहा कि सबसे अहम बात यह है कि सीजफायर हुआ है-चाहें वह किसी की भी मध्यस्थता से हुआ हो।
अब्दुल्ला ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भी अमेरिका पर दबाव बनाया। उन्होंने कहा कि दुनिया को यह बताया जाना चाहिए कि यह युद्ध क्यों शुरू हुआ, क्योंकि ईरान ने इसे शुरू नहीं किया था, बल्कि उस पर थोपा गया।
उन्होंने कहा कि अब अमेरिका यह दावा कर रहा है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में सफलता हासिल की है, जबकि यह पहले भी खुला हुआ था। इस युद्ध ने ईरान को यह कहने का मौका दे दिया है कि वह इस रास्ते से मिलने वाले जहाजों पर टैक्स लगाएगा।
बता दें कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर में महत्वपूर्ण मध्यस्थता की भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के प्रयासों से दोनों पक्षों के बीच बैकचैनल वार्ता हुई। पाकिस्तान ने संदेशों का आदान-प्रदान कर ट्रंप प्रशासन और ईरानी नेतृत्व को समझौते की ओर ले गया।