डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के साथ देश में साइबर ठगी तेजी से बढ़ रही है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार 2020 से 2025 के बीच साइबर फ्रॉड से करीब 52,976 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। निवेश और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे फर्जी तरीकों से ठगी के मामले सबसे अधिक हैं। 2025 में ही 19,812.96 करोड़ रुपए की ठगी हुई, जिसमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना प्रमुख हॉटस्पॉट रहे हैं।
Cyber Fraud in India: देश में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन गतिविधियों के बढ़ते दायरे के साथ साइबर ठगी एक गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बनती जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आइ4सी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 से 2025 के बीच भारत में साइबर फ्रॉड के कारण करीब 52,976 करोड़ रुपए की भारी आर्थिक चपत लगी है। रिपोर्ट बताती है कि ठगों ने निवेश, शेयर, क्रिप्टोकरेंसी और फर्जी रिटर्न के नाम पर लोगों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया। इसके साथ ही पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाने के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। केवल 2025 में ही 19,812.96 करोड़ रुपए की ठगी हुई और 21.77 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं।
राज्यवार आंकड़ों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना साइबर ठगी के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं। वर्ष 2025 में देश में हुए कुल नुकसान का आधे से अधिक हिस्सा इन्हीं पांच राज्यों में दर्ज किया गया।
करीब 45% साइबर शिकायतें दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों—कंबोडिया, म्यांमार और लाओस—से जुड़े गिरोहों की ओर इशारा करती हैं। ये अपराधी अब शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों में भी फेक लोन ऐप और वर्क फ्रॉम होम जैसे झांसों से लोगों को निशाना बना रहे हैं।
2020 से 2025 तक साइबर धोखाधड़ी में हर साल तेज उछाल देखा गया है। 2024 में जहां 22,849 करोड़ रुपए की ठगी हुई, वहीं 2025 में शिकायतों की संख्या सबसे ज्यादा रही।
सीजेआई सूर्यकांत ने साइबर अपराधों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि इन अपराधों में वरिष्ठ नागरिक सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं और उनसे हजारों करोड़ रुपए की ठगी की जा चुकी है। उन्होंने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी नई धोखाधड़ी तकनीकों का जिक्र करते हुए कहा कि डिजिटल युग में अपराध का स्वरूप बदल गया है। न्यायपालिका को ऐसे मामलों से निपटने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि साइबर अपराध आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को सीधे प्रभावित कर रहे हैं।