
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को पुष्पांजलि अर्पित की। Photo - @@rashtrapatibhvn)
BJP jabs Congress on Rajaji statue: राष्ट्रपति भवन के केंद्रीय प्रांगण में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा के अनावरण ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस कदम की सराहना की। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस के भीतर वैचारिक मतभेद के रूप में पेश किया।
वहीं शशि थरूर की तारीफ करते हुए भाजपा प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने सोशल मीडिया 'X' पर लिखा, “दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस के कुछ लोग लुटियंस को राजाजी के ऊपर, विदेशी को स्वदेशी के ऊपर, औपनिवेशिक को भारतीय के ऊपर रखते हैं।” शहजाद पूनावाला का यह तंज शशि थरूर के हालिया पोस्ट की तरफ इशारा था, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति भवन में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की मूर्ति के अनावरण का स्वागत किया।
शहजाद पूनावाला यही नहीं रुके। उन्होंने पीडीपी की इलतिजा मुफ्ती की 'लुटियंस' के दिए गए बयान पर भी टिप्पणी की और कहा कि इस मामले में विभिन्न दृष्टिकोण दिखाते हैं कि कांग्रेस और INDIA ब्लॉक “लुटियंस को लेकर विभाजित” हैं।
इलतिजा मुफ्ती ने लुटियंस की मूर्ति हटाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, "भारत के इतिहास के प्रति गुस्से की इस विकृत और गलत भावना को जारी रखने से देश का क्या भला होगा? 'औपनिवेशिक हैंगओवर' (गुलामी की मानसिकता) को मिटाने का यह जुनून कैसा है? लुटियंस ही दिल्ली को वह पहचान देते हैं जो आज वह है। आप केवल मूर्तियों और पट्टिकाओं को हटाकर विरासत या इतिहास को नहीं मिटा सकते। भारत के अधिकांश वास्तुशिल्प चमत्कार ब्रिटिश और मुगल काल के हैं। तो इसमें बड़ी बात क्या है!"
थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया 'X' पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वह राजाजी की उदार अर्थव्यवस्था और स्वतंत्र उद्यम के समर्थन की सराहना करते हैं, और उनके मूल्य “साम्प्रदायिक पक्षपात से मुक्त” थे। शशि थरूर ने कहा, “दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज उनके मार्ग का अनुसरण करने वाले इतने कम लोग बचे हैं।”
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की मूर्ति सोमवार को राष्ट्रपति भवन में अनावरण की। यह मूर्ति ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की मूर्ति की जगह बनाई गई।
राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक हैंडल ने इस संबंध में कहा, “यह पहल औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को दूर करने और भारत की संस्कृति, विरासत और कालातीत परंपराओं को गर्व के साथ अपनाने, तथा उन व्यक्तियों को सम्मानित करने की एक श्रृंखला का हिस्सा है, जिन्होंने भारत माता की सेवा में असाधारण योगदान दिया।”
Updated on:
24 Feb 2026 02:39 pm
Published on:
24 Feb 2026 02:32 pm
