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पश्चिम बंगाल सरकार ने नहीं सुनी बात तो कलकत्ता हाई कोर्ट ने लगाई फटकार, अब केंद्र की एंट्री तय

पूर्वी कोलकाता के संरक्षित वेटलैंड्स में अवैध निर्माण पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पक्षकार बनाने और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बलों की तैनाती के संकेत दिए हैं। अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।

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Calcutta High Court and West Bengal CM Mamata Banerjee

पूर्वी कोलकाता के संरक्षित वेटलैंड्स में अवैध निर्माण पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है। (Photo - IANS)

Calcutta High Court on East Kolkata Wetlands Illegal Construction: पूर्वी कोलकाता के संरक्षित वेटलैंड्स क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध निर्माण पर सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। इस मामले में जस्टिस अमृता सिन्हा ने पश्चिम बंगाल सरकार (ममता सरकार) और कोलकाता नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष जताते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है।

इतना ही नहीं, कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य प्रशासन अवैध निर्माण हटाने में असमर्थ रहता है तो केंद्रीय बलों की मदद ली जाएगी। कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार, पूर्वी कोलकाता के वेटलैंड क्षेत्र में 500 से अधिक अवैध निर्माण किए गए हैं। ये निर्माण पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं।

'जमीन पर कार्रवाई दिखनी चाहिए'

दक्षिण 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट ने इस मामले से संबंधित एक रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। दूसरी ओर, पूर्वी कोलकाता आर्द्रभूमि प्रबंधन प्राधिकरण (East Kolkata Wetlands Management Authority) ने न्यायालय को बताया कि अवैध निर्माणों की बिजली काटने के प्रयास के दौरान अधिकारियों को विरोध का सामना करना पड़ा।

मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए जस्टिस अमृता सिन्हा ने कहा कि केवल कागजों पर रिपोर्ट नहीं, बल्कि जमीन पर कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च के लिए निर्धारित की है, जिसमें केंद्र सरकार की भूमिका और आगे की कार्रवाई की रूपरेखा पर चर्चा होने की संभावना है।