
संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र के दौरान 'एक देश, एक चुनाव' से जुड़ा बिल पेश नहीं किया जाएगा। बिल पेश नहीं होने पर इस पर चर्चा भी नहीं होगी। इस विधेयक की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। अब समिति को अपनी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक सौंपनी होगी।
जेपीसी का कार्यकाल बढ़ाए जाने के बाद अब स्थिति स्पष्ट हो गई है कि समिति अपनी रिपोर्ट मौजूदा सत्र के दौरान पेश नहीं करेगी। ऐसे में 'एक देश, एक चुनाव' विधेयक पर आगे की प्रक्रिया अब शीतकालीन सत्र में रिपोर्ट आने के बाद ही आगे बढ़ने की संभावना है।
शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक लोकसभा में संयुक्त संसदीय समिति ( JPC) का कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पी पी चौधरी ने पेश किया था, जिसे ध्वनि मत से मंज़ूरी मिल गई।
देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए संवैधानिक चुनौतियां भी हैं। राज्यों की विधान सभाओं के कार्यकाल में एकरूपता लाने के लिए राष्ट्रपति शासन का दुरुपयोग किया जा सकता है।
2024 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत के 96 करोड़ से अधिक मतदाताओं के लिए 1 मिलियन से अधिक मतदान केंद्रों और व्यापक सुरक्षा संसाधनों की आवश्यकता होगी। वहीं एक साथ चुनाव करवाने से प्रशासनिक क्षमता पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।