मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) की मुश्किल बढ़ सकती है। विपक्षी दलों ने फिर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव (Impeachment Motion) लाने की तैयारी की है।
Impeachment Motion Against CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्षी दलों ने एक बार फिर महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी तेज कर दी है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और INDIA गठबंधन की अन्य प्रमुख पार्टियां संसद के दोनों सदनों में नया नोटिस पेश करने पर विचार कर रही हैं। विपक्षी दलों का यह कदम उनके पिछले महाभियोग नोटिस को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा 6 अप्रैल 2026 को खारिज किए जाने के महज कुछ दिनों बाद उठाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की है और एक नया मसौदा तैयार करने का काम भी शुरू कर दिया है। अगले कुछ दिनों में नया नोटिस लोकसभा, राज्यसभा या दोनों सदनों में पेश किया जा सकता है। विपक्ष अब कम से कम 200 लोकसभा और 80 राज्यसभा सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की कोशिश में जुटा है, जबकि संवैधानिक रूप से लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 50 हस्ताक्षरों की जरूरत होती है।
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए फिर से महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी की है। इसके पहले पहले 12 मार्च 2026 को पेश किए गए नोटिस में कुल 193 सांसदों (130 लोकसभा+63 राज्यसभा) के साइन थे, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने उसे खारिज कर दिया था।
विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार पर 7 गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इन आरोपों में नियुक्ति प्रक्रिया में खामी, पक्षपातपूर्ण व्यवहार, चुनावी अनियमितताएं, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर वोटरों की सूची से नाम काटना, चुनावी धोखाधड़ी की जांच में बाधा डालना और जनता के विश्वास को कमजोर करना शामिल है। विपक्ष इसे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और लोकतंत्र की रक्षा का मुद्दा बता रहा है।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में TMC सबसे आगे है। पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर TMC और चुनाव आयोग के बीच तीखा विवाद रहा है। TMC सांसदों ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए उनके समर्थक वोटरों के नाम गायब किए जा रहे हैं, जिससे BJP को फायदा हो रहा है। हालांकि, विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर व्यापक सहमति है, लेकिन नया प्रस्ताव दोनों सदनों में अलग-अलग या एक सदन में पेश करने का फैसला अभी अंतिम रूप से नहीं लिया गया है।विपक्षी नेता इसे चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश देने की रणनीति भी मान रहे हैं।
सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर चुनाव आयोग को बदनाम करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया है। ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे। यह भारतीय इतिहास में किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पहला महाभियोग नोटिस था, जिसे खारिज कर दिया गया। अब नया प्रयास विपक्ष की एकजुटता और संवैधानिक प्रक्रिया की बहस को फिर से तेज कर सकता है।