
TMC BJP Conflict over Baruipur Murder Case: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 11 से 12 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी और हत्या की दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके इर्द-गिर्द पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीखा टकराव भी देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण बन गया है।
टीएमसी ने आरोप लगाया है कि पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को बारुईपुर जाने से रोका गया। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है और राज्य में सुपर इमरजेंसी जैसे हालात पैदा कर दिए गए हैं। टीएमसी सांसद डोला सेन (Dola Sen) ने दावा किया कि प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर अत्यधिक पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती की गई, जिससे न केवल आवागमन बाधित हुआ बल्कि राजनीतिक गतिविधियों पर भी अंकुश लगाने की कोशिश की गई।
वहीं, सांसद प्रतिमा मंडल (Pratima Mondal) ने इसे लोकतंत्र पर गंभीर हमला बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई विपक्षी आवाजों को दबाने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी और ममता बनर्जी से राजनीतिक रूप से डर के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न की गई है।
स्थिति का जायजा लेने के लिए टीएमसी ने एक तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बिमान बनर्जी, डोला सेन और प्रतिमा मंडल को बारुईपुर भेजा। यह टीम ममता बनर्जी के आवास से रवाना हुई और घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करने में जुट गई।
रविवार को ममता बनर्जी के आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया था। केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर टीएमसी ने गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे नजरबंदी जैसी स्थिति बताया है। टीएमसी का कहना है कि यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था से अधिक राजनीतिक नियंत्रण की कोशिश प्रतीत होती है, जबकि प्रशासन इसे पूरी तरह सामान्य सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बता रहा है।
टीएमसी नेता मदन मित्रा (Madan Mitra) ने कहा कि पार्टी किसी भी स्थिति में जनता की आवाज दबने नहीं देगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बारुईपुर घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिलना चाहिए।
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने इस मामले को लेकर बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े वादों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात चिंताजनक बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रभाव न्याय प्रणाली पर भारी पड़ रहा है, जिससे कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन की ओर से मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जादवपुर सांसद सायोनी घोष (Sayoni Ghosh) ने भी सोशल मीडिया पर इस जांच प्रक्रिया की जानकारी साझा की है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।