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अमेरिका का सपोर्ट पाने के लिए 20 सालों तक हमने खुद को किराए पर दे दिया, पाक मंत्री का छलका दर्द

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुलासा किया कि अफगानिस्तान की दशकों पुरानी लड़ाइयों में पाकिस्तान धार्मिक या जिहाद के लिए नहीं कूदा था। असल वजह राजनीतिक वैधता हासिल करना और वैश्विक महाशक्तियों (खासकर अमेरिका) से समर्थन पाना था।

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Feb 12, 2026
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- ANI)

पाकिस्तान के रक्षा मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ ने बड़ा राज खोला है। उन्होंने खुलकर बताया है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान की दशकों पुरानी लड़ाई में क्यों कूदा था।

रक्षा मंत्री ने कहा कि धार्मिक वजहों से अफगानिस्तान की दशकों पुरानी लड़ाई में पाकिस्तान शामिल नहीं हुआ था। बल्कि वह पॉलिटिकल लेजिटिमेसी और ग्लोबल ताकतों से सपोर्ट पाने के लिए इस लड़ाई में कूदा था।

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अमेरिका का सपोर्ट पाने के लिए लड़ाई में कूदा पाक

नेशनल असेंबली में आसिफ ने कहा कि कोल्ड वॉर के दौरान शुरू हुई लड़ाई 11 सितंबर, 2001 के हमले के बाद भी जारी रही। अफगानिस्तान से जुड़ी लड़ाइयों में पाकिस्तान का शामिल होना एक रणनीति थी।

उन्होंने आगे कहा कि अफगानिस्तान की लड़ाई इंटरनेशनल कम्युनिटी खासकर अमेरिका का सपोर्ट पाने के लिए एक स्ट्रेटेजिक चॉइस थी। आसिफ ने अपने भाषण में कहा- हम इन लड़ाइयों में इस्लाम की रक्षा या जिहाद के लिए नहीं उतरे थे।

आसिफ ने कहा कि आजादी के बाद से अफगानिस्तान के प्रति पाकिस्तान की पॉलिसी बदलते जियोपॉलिटिकल कैलकुलेशन के हिसाब से बनी हैं।

उन्होंने कहा कि सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान जिसे जिहाद कहा गया था, वह असल में एक प्रॉक्सी लड़ाई थी जिसमें बड़ी ताकतों ने हिस्सा लिया था।

लड़ाई के लिए हमने अपना एजुकेशन सिस्टम बदल दिया

आसिफ ने कहा- वह जिहाद नहीं था। वह एक सुपरपावर की लड़ाई थी। और उस लड़ाई के लिए हमने अपना एजुकेशन सिस्टम बदल दिया। आज भी उस करिकुलम को पूरी तरह से ठीक नहीं किया गया है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने लड़ाई की कहानी के हिसाब से अपना इतिहास फिर से लिखा और उन पॉलिसी के लंबे समय के सामाजिक और सोच पर असर को हाईलाइट किया। हमने उस तथाकथित जिहाद में फिट होने के लिए समाज, राजनीति और धर्म को फिर से बनाया।

20 साल तक अफगानिस्तान में लड़ाई लड़ी

ख्वाजा आसिफ ने माना कि सोवियत के जाने के बाद पाकिस्तान ने कुछ नहीं सीखा और 9/11 हमलों के बाद फिर से अमेरिका के साथ हो गया। इसके बाद लगभग 20 साल तक अफगानिस्तान में वाशिंगटन की लीडरशिप वाली लड़ाई में शामिल रहा।

रक्षा मंत्री का छलका दर्द

इस बीच, पाक के रक्षा मंत्री का दर्द भी छलका। उन्होंने कहा- अफगानिस्तान में एक दशक नहीं, बल्कि दो दशकों तक हमने खुद को किराए पर दे दिया। एकमात्र मकसद अमेरिकी सपोर्ट हासिल करना था।

उन्होंने कहा कि 9/11 हमलों के पीछे कोई भी अफगान नहीं था और एक देश के तौर पर अफगानिस्तान इसके लिए जिम्मेदार नहीं था।

रक्षा मंत्री ने कहा कि 9/11 हमलों के बाद पाकिस्तान युद्ध में शामिल हो गया। पाकिस्तान का नेतृत्व बार-बार उन गलतियों को मानने में नाकाम रहा है जो उसने पहले की थीं।

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