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SP बोली- मुस्लिम महिलाओं को भी मिले आरक्षण, अमित शाह ने कहा- ये नहीं होगा

Parliament Session: संसद में महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन बिलों पर तीखी बहस हुई, जिसमें विपक्ष ने सरकार पर संविधान से छेड़छाड़ के आरोप लगाए।

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भारत

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Devika Chatraj

Apr 16, 2026

परिसीमन के बाद लोक सभा का बदल जाएगा समीकरण (Photo-IANS)

Women Reservation Bill: संसद में आज महिला आरक्षण कानून से जुड़े तीन अहम संशोधन बिल पेश किए गए। इन बिलों को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली और विपक्ष ने इसका जोरदार विरोध किया। विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम संविधान से छेड़छाड़ जैसा है।

विपक्ष का विरोध

सबसे पहले कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इन बिलों का विरोध करते हुए कहा कि सरकार संविधान को हाईजैक करने की कोशिश कर रही है। उनके इस बयान के बाद सदन में माहौल और गरमा गया।

सपा सांसद का विरोध

इसके बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि जब तक मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाएगा, तब तक इस कानून का कोई मतलब नहीं है।

अमित शाह का जवाब

विपक्ष के आरोपों पर गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना पूरी तरह से असंवैधानिक है और इसका कोई सवाल ही नहीं उठता।

अखिलेश यादव अमित शाह में तीखी बहस

इस पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि पूरा देश आधी आबादी यानी महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में है, लेकिन मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या व्यवस्था होगी, यह स्पष्ट होना चाहिए। इसके जवाब में अमित शाह ने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी चाहती है तो वह अपनी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, सरकार को इससे कोई आपत्ति नहीं होगी।

महिला आरक्षण बिल में क्या है खास?

  • इस संशोधन प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है, जो वर्तमान में 543 है।
  • राज्यों में कुल 815 सीटें प्रस्तावित की गई हैं।
  • केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें तय की गई हैं।
  • सीटों का अंतिम निर्धारण परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया के बाद किया जाएगा।
  • इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

क्यों है यह बिल जरुरी?

यह बिल महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, राजनीतिक दलों के बीच इसे लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं। सत्ता पक्ष इसे ऐतिहासिक सुधार बता रहा है, जबकि विपक्ष इसमें कई खामियां बता रहा है।