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लोकसभा में पेश हुआ 850 सीटों वाला बिल, चर्चा के पक्ष में पड़े 251 वोट; जानें विपक्ष को कितने मिले मत

Women Reservation Bill: सदन में बिलों को पेश करने के बाद ध्वनि मत से पास कराने की कोशिश की गई, लेकिन विपक्ष ने वोटिंग की मांग की।

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भारत

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Ashib Khan

Apr 16, 2026

Lok Sabha

लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का बिल हुआ पेश (Photo-IANS)

Parliament Special Session: संसद में गुरुवार को महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 बिल पेश किए गए। इसका मकसद 2029 तक महिलाओं के लिए आरक्षण कानून को लागू करना और लोकसभा में सांसदों की संख्या को बढ़ाकर 850 करना है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने सदन में यह विधेयक पेश किया। बिल के पेश होने पर लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ। सपा ने इसका विरोध किया। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सपा सांसद अखिलेश यादव के सवालों का जवाब भी दिया।

सदन में पेश हुए बिल

सदन में बिलों को पेश करने के बाद ध्वनि मत से पास कराने की कोशिश की गई, लेकिन विपक्ष ने वोटिंग की मांग की। इसके बाद स्पीकर ने बिल पर चर्चा के लिए वोटिंग की अनुमति दी। सरकार के पक्ष में 251 सांसदों ने वोट दिया, जबकि विपक्ष को 185 वोट मिले। 

कैसे हुई वोटिंग?

विपक्ष के डिवीजन की मांग के बाद औपचारिक मतदान कराया गया। वोटिंग में 251 सांसदों ने समर्थन किया, जबकि 185 सांसदों ने विरोध में वोट डाला। दरअसल, आमतौर पर लोकसभा में विधेयक व प्रस्ताव वॉयस वोट से पारित होते हैं, लेकिन जब परिणाम पर संदेह होता है, तो डिवीजन के जरिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग कराई जाती है।

वोट स्लिप का भी इस्तेमाल

डिवीजन के बाद वोट स्लिप के जरिए भी मतदान कराया गया, जिसमें 333 सांसदों ने वोट डाला और इस दौर में किसी ने मतदान से दूरी नहीं बनाई। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, यदि कोई सदस्य अपना वोट बदलना चाहता है तो वह स्लिप के जरिए ऐसा कर सकता है।

क्या कहा सचिवालय ने?

लोकसभा के सचिव-जनरल उत्पल सिंह ने सदस्यों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम की जानकारी देते हुए बताया कि वोट तभी दर्ज होगा जब सदस्य सही समय पर बटन दबाएं। साथ ही, सदस्य अपने वोट को व्यक्तिगत परिणाम बोर्ड पर देख सकते हैं।

राजनीतिक माहौल गरम

महिला आरक्षण बिल को पेश करने को लेकर सदन में राजनीतिक सरगर्मी देखने को मिली। विपक्ष ने स्पष्ट रूप से डिवीजन की मांग की, जिसके बाद यह प्रक्रिया अपनाई गई।

वहीं बीजेपी सासंद कमलजीत सेहरावत ने कहा कि 1971 की जनगणना के आधार पर 1976 में डिलिमिटेशन किया गया था। उस समय इसे 2026 तक के लिए टाल दिया गया था। डिलिमिटेशन 2026 में होना है; यह BJP ने तय नहीं किया था, लेकिन ऐसा लिखा हुआ है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में पास हुआ था, जिसे भविष्य में लागू किया जाना था। इसलिए सरकार ये दोनों बिल ला रही है, और सभी को इनका समर्थन करना चाहिए।