Pakistan ex PM Imran Khan: पाकिस्तान में हाल ही में एक कथित राजनयिक बातचीत की केबल लीक हुई है जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सत्ता से हटाने के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हाथ है।
Pakistan ex PM Imran Khan: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सत्ता से हटाने के पीछे अमेरिकी ताकतों का हाथ था। हाल ही में पाकिस्तान में लीक हुए एक कथित गोपनीय राजनयिक केबल में यह दावा किया जा रहा है। ड्रॉप साइट द्वारा सार्वजनिक किए गए इस दस्तावेज में यह कहा गया है कि वाशिंगटन में पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत और अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू के बीच हुई बातचीत में इमरान खान को हटाने के बाद संबंध बेहतर होने की बात कही गई थी। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान में एक नया बवाल शुरू हो गया है और इमरान खान की पार्टी तहरीक ए इंसाफ के समर्थक सरकार से इसका जवाब मांग रहे है।
लीक हुए दस्तावेज को केबल आई 0678 बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार बातचीत मार्च 2022 में हुई थी, जब इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आगे बढ रहा था। दस्तावेज में कहा गया कि सत्ता परिवर्तन होने पर अमेरिका और यूरोप के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार संभव होगा। इसमें संकेत दिया गया कि इमरान खान के पद पर बने रहने की स्थिति में पाकिस्तान को कूटनीतिक अलगाव का सामना करना पड सकता है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन इन आरोपों को गलत बता चुका है।
इमरान खान लंबे समय से कहते रहे हैं कि उनकी स्वतंत्र विदेश नीति कुछ पश्चिमी देशों को पसंद नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि रूस और चीन के साथ संतुलित संबंध रखने की वजह से उनकी सरकार को निशाना बनाया गया। हालांकि पाकिस्तान मुस्लिम लीग एन और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने हमेशा इन दावों को खारिज किया है। दोनों दलों का कहना है कि इमरान खान की सरकार आर्थिक चुनौतियों और राजनीतिक अस्थिरता के कारण गिरी थी। पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ ने इस लीक को विदेशी दबाव का मजबूत संकेत बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस खुलासे से पाकिस्तान में अविश्वास और बढ सकता है। इमरान खान अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव हारने वाले पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने थे। बाद में भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। लीक दस्तावेज में कथित रूप से इस्तेमाल हुआ वाक्य सब माफ कर दिया जाएगा भी चर्चा का केंद्र बन गया है। आलोचकों का कहना है कि इससे सत्ता परिवर्तन के बाद अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में संभावित नरमी का संकेत मिलता है।