
NEET पेपर लीक मामले में बड़े खुलासे
NEET UG 2026 Paper Leak: NEET-UG परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को एक बड़े और संगठित नेटवर्क के सबूत मिलते दिख रहे हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई राज्यों में फैला एक जटिल गिरोह शामिल हो सकता है, जिसमें बिचौलिए, शिक्षा से जुड़े लोग और कुछ परीक्षा विशेषज्ञों तक की भूमिका की जांच हो रही है।
इस मामले में पुणे के सुखसागर नगर की रहने वाली 46 साल मनीषा वाघमारे की गिरफ्तारी हुई है, जो पेशे से ब्यूटीशियन हैं और एक ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। CBI के अनुसार, वह छात्रों को ट्यूशन शिक्षकों और कथित प्रभावशाली शिक्षा नेटवर्क से जोड़ने का काम करती थीं। एजेंसी का आरोप है कि इसी कनेक्शन के जरिए पेपर लीक से जुड़ी कड़ियां आगे बढ़ीं और इसके बदले उन्हें कमीशन मिलने की बात भी सामने आई है। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है।
जांच में एक और अहम नाम सामने आया है मनीषा गुरुनाथ मांडरे, जो कथित तौर पर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की प्रश्नपत्र निर्माण पैनल से जुड़ी विशेषज्ञ रही हैं। CBI का दावा है कि उन्हें NEET-UG के बॉटनी और जूलॉजी प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी। आरोप है कि उन्होंने आर्थिक लाभ के बदले कुछ चुनिंदा छात्रों तक प्रश्नपत्र या उससे जुड़ी गोपनीय जानकारी पहुंचाई। एजेंसी ने उन्हें इस साजिश का संभावित मुख्य साजिशकर्ता बताया है, हालांकि यह अभी जांच के शुरुआती चरण में है और आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।
इस मामले में सेवानिवृत्त शिक्षक पी. वी. कुलकर्णी का नाम भी सामने आया है, जिन्हें हिरासत में लिया गया है। इसके अलावा एक अन्य आरोपी को भी CBI हिरासत में भेजा गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह नेटवर्क केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें कई बिचौलिए और एजेंट भी शामिल हो सकते हैं।
CBI की जांच के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क कई शहरों में फैला हुआ था, जिसकी शुरुआत पुणे से हुई थी। इसके बाद नाशिक में काउंसलिंग और शिक्षा व्यवसाय से जुड़े लोगों के साथ संपर्क स्थापित किया गया। धीरे-धीरे यह नेटवर्क गुरुग्राम और जयपुर तक फैल गया, जहां डिजिटल माध्यमों से प्रश्नपत्रों का प्रसार किया गया। आरोप है कि प्रश्नपत्रों को PDF फॉर्म में साझा किया जाता था और छात्रों से प्रति डील लगभग 10 लाख रुपये तक की मांग की जाती थी। इस पूरी रकम का बंटवारा पहले से तय हिस्सों के अनुसार अलग-अलग आरोपियों के बीच किया जाता था।
CBI का कहना है कि यह एक बड़ा आपराधिक षड्यंत्र हो सकता है, जिसमें अभी कई और नाम सामने आने बाकी हैं। एजेंसी का मानना है कि आगे की पूछताछ में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं और पूरे नेटवर्क की परतें धीरे-धीरे खुलेंगी।
Updated on:
18 May 2026 12:26 pm
Published on:
18 May 2026 12:24 pm
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