
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद । ( फोटो : ANI)
Medical Entrance Exam : देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी 2026) के पेपर लीक होने और उसके बाद परीक्षा रद्द करने के फैसले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस गंभीर मुद्दे पर अब सियासत बहुत गर्म हो गई है। विपक्षी दल केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली और उसकी नैतिक जिम्मेदारी पर लगातार तीखे हमले कर रहे हैं। इस परीक्षा के आयोजन और गोपनीयता पर उठ रहे सवालों ने देश के भविष्य यानि छात्रों के मन में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है।
उत्तर प्रदेश से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने रविवार को इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए कहा कि परीक्षाओं का इस तरह बार-बार लीक होना बेहद चिंताजनक है। मसूद ने गुस्से में सवाल उठाया, 'पिछले साल भी नीट का पेपर लीक हुआ था और इस साल भी वही कहानी दोहराई गई। आखिर इस सरकार की नैतिकता कहां चली गई है?' उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार का ध्यान केवल विपक्ष के खिलाफ ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल करने में है, जबकि देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है।
दूसरी तरफ, कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी इस विवाद को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने इस घटना को एक 'बड़ी त्रासदी' करार देते हुए कहा कि यह कोई अप्रत्याशित हादसा नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित और व्यवस्थित साजिश है। खड़गे का आरोप है कि इसमें सीधे तौर पर सत्ता पक्ष से जुड़े लोग शामिल हैं, जिन्होंने देश के 22 लाख से अधिक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के सपनों को कुचल दिया है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तुरंत इस्तीफे की मांग की है। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रसिद्ध कार्यक्रम 'परीक्षा पे चर्चा' का जिक्र करते हुए पूछा कि प्रधानमंत्री नीट के इस महासंकट पर कब चर्चा करेंगे?
इस बीच, मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सीबीआई ने रविवार को इस मामले की मुख्य आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंधारे को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। जांच एजेंसी ने पूछताछ और नेटवर्क का भंडाफोड़ करने के लिए कोर्ट से आरोपी की 14 दिनों की हिरासत मांगी है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार की गई महिला नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के उस महत्वपूर्ण पैनल का हिस्सा थी, जो परीक्षा के अनुवाद और विशेषज्ञता का काम संभालता है। सीबीआई ने अदालत को सूचित किया है कि आरोपी महिला ने प्रश्न पत्र के बदले छात्रों से मोटी रकम वसूली थी। फिलहाल एनटीए की पूरी कार्यप्रणाली और परीक्षा प्रक्रिया की गहनता से पड़ताल की जा रही है। ध्यान रहे कि शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर बीते 12 मई को इस संबंध में एफआईआर दर्ज की गई थी।
दिन-रात एक कर के पढ़ाई करने वाले बच्चों के भविष्य को चंद पैसों के लिए बेच दिया गया। एनटीए जैसी बड़ी संस्था पर से अब देश का भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो मिसाल बने। इस मामले में सीबीआई की हिरासत मिलने के बाद आरोपी मनीषा गुरुनाथ से कड़ाई से पूछताछ की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, इस रैकेट के तार कई राज्यों के कोचिंग सेंटरों और सॉल्वर गैंग से जुड़े हुए हो सकते हैं। आने वाले दिनों में कुछ बड़े नामों और अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। इसके अलावा, देश भर के छात्र संगठन बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं।
बहरहाल,नीट परीक्षा का बार-बार विवादों में आना न केवल परीक्षा प्रणाली की कमजोरी दिखाता है, बल्कि यह देश के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी एक बड़ा खतरा है। अगर अयोग्य लोग पैसे के दम पर देश की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली में प्रवेश पा लेंगे, तो आने वाले समय में देश के नागरिकों के स्वास्थ्य और इलाज की गुणवत्ता का क्या होगा? यह सिर्फ एक पेपर लीक नहीं, बल्कि देश के स्वास्थ्य तंत्र के साथ खिलवाड़ है। (इनपुट: ANI)
Published on:
17 May 2026 03:34 pm
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