
Haryana School Principal Suspended: पंचकूला के एक सरकारी स्कूल में छह साल की बच्ची के साथ हुई हिंसा ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर फिर से चिंता बढ़ा दी है। इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत कार्रवाई की और स्कूल के प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया। अब आठ साल के एक बच्चे की मनोवैज्ञानिक जांच की भी तैयारी चल रही है। उधर, जिस बच्ची को पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था, उसकी तबीयत अब धीरे-धीरे सुधर रही है।
हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने नियमों के मुताबिक प्रिंसिपल को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। निलंबन के दौरान प्रिंसिपल को जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला के दफ्तर में रिपोर्ट करना होगा। प्रिंसिपल के निलंबन का आदेश खुद विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया ने जारी किया है।
इस मामले में इससे पहले दो जूनियर बेसिक ट्रेनिंग (JBT) शिक्षकों को भी निलंबित किया गया था। पुलिस ने स्कूल के प्रिंसिपल, कक्षा प्रभारी और चौकीदार के खिलाफ सेक्टर-20 थाने में एफआईआर दर्ज की है। उन पर किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 125-B के तहत केस हुआ है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है।
जहां तक बच्ची की तबीयत की बात है, PGIMER चंडीगढ़ में डॉक्टरों की एक टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है। हालत में सुधार हो रहा है, लेकिन अभी उसे हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने में थोड़ा समय लगेगा। उम्मीद है कि अगले एक-दो दिन में उसकी सेहत और बेहतर हो जाएगी।
PGIMER के निदेशक डॉ. विवेक लाल ने अस्पताल पहुंचकर बच्ची का हाल जाना और उपचार कर रहे चिकित्सकों से बातचीत की। उन्होंने आश्वासन दिया कि बच्ची को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और इलाज का पूरा खर्च संस्थान वहन कर रहा है। अलग-अलग विशेषज्ञों की टीम उसकी जरूरत के अनुसार उपचार कर रही है।
बच्ची के परिवार के लिए यह घटना बेहद पीड़ादायक रही है। उसके चाचा के अनुसार, परिवार मानसिक रूप से काफी परेशान है। बच्ची जब घटना के बारे में बताने की कोशिश करती है, तो परिजन प्यार से उसका ध्यान दूसरी ओर कर देते हैं, ताकि उसे दोबारा मानसिक तकलीफ से न गुजरना पड़े।
बच्ची की बड़ी बहन भी उसी स्कूल में कक्षा दो की छात्रा है और इस घटना से प्रभावित है। परिवार ने शुरुआत में दोनों बच्चियों का स्कूल बदलने पर विचार किया था, लेकिन सरकार और संबंधित विभागों की ओर से सहायता तथा दोषियों पर कार्रवाई के आश्वासन के बाद फिलहाल यह फैसला टाल दिया गया है। उल्लेखनीय है कि घायल बच्ची डॉक्टर बनने का सपना देखती है।
मामले में सोमवार को कानून के उल्लंघन के आरोपों से जुड़े आठ वर्षीय बच्चे का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन निर्धारित किया गया है। किशोर न्याय व्यवस्था के तहत ऐसे मामलों में बच्चे की उम्र, मानसिक स्थिति और परिस्थितियों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होता है। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (HSCPCR) ने जिला शिक्षा अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के निर्देश पर गठित समिति भी अपनी जांच रिपोर्ट जल्द सौंप सकती है। इसके अलावा हरियाणा मानवाधिकार आयोग भी मामले का स्वतः संज्ञान लेने पर विचार कर सकता है।
इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की निगरानी, शिक्षकों की जिम्मेदारी और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 17 बच्चों को शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करती है। वहीं, किशोर न्याय अधिनियम बच्चों की देखभाल, संरक्षण और कानून से संघर्ष की स्थिति में उनके प्रति संवेदनशील प्रक्रिया पर जोर देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूलों में सुरक्षित वातावरण के लिए केवल सीसीटीवी कैमरे पर्याप्त नहीं हैं। नियमित निगरानी, प्रशिक्षित स्टाफ, स्पष्ट शिकायत व्यवस्था और बच्चों के व्यवहार में बदलाव को समझने की क्षमता भी जरूरी है। पंचकूला का यह मामला अब केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे शिक्षा तंत्र के सामने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती रख दी है।