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UP Election 2027: उत्तर प्रदेश चुनाव में BJP का ‘बिहार फॉर्मूला’: 2017 से पहले के दौर की याद दिलाकर क्या साध रही है पार्टी?

BJP Bihar Election Formula: सत्ता में करीब एक दशक बिताने के बाद भी BJP के चुनावी संदेश में 2017 से पहले का उत्तर प्रदेश प्रमुखता से मौजूद है। आखिर पार्टी अपने कामकाज के साथ पुराने राजनीतिक दौर को इतनी अहमियत क्यों दे रही है?
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भारत

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Manoj Vashisth

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Updated: 2 Nov 2026, 8:31 AM IST

BJP UP Election 2027

BJP UP Election 2027 : यूपी चुनाव 2027: BJP ने फिर छेड़ा सपा सरकार का पुराना दौर, योगी से अमित शाह तक कानून-व्यवस्था और राम मंदिर पर हमलावर (फोटो सोर्स: ANI)

BJP UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का माहौल बनना शुरू हो गया है। BJP के बड़े नेता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक अपने भाषणों में बार-बार समाजवादी पार्टी के पुराने शासन की चर्चा छेड़ रहे हैं। ये रणनीति सिर्फ विरोध की बात नहीं है; वो वोटर्स के सामने दो जमाने, दो सरकारों की तस्वीर भी पेश करना चाहते हैं। वैसे, ऐसा ही प्रचार NDA ने बिहार चुनाव में भी किया था याद होगा, पुराने दौर का ज़िक्र बार-बार उछाला गया।

BJP Bihar Election Formula: 2017 से पहले के शासनकाल को बार-बार उठा रही BJP

इस बार यूपी की सियासत सिर्फ मौजूदा सरकार के काम पर ही नहीं टिकेगी। BJP 2017 से पहले की सपा सरकार को बार-बार सामने ला रही है। योगी की रैलियों हों या अमित शाह के बयान, हर जगह कानून-व्यवस्था, माफिया, दंगे और अयोध्या आंदोलन की बात सुनने को मिल रही है।

याद करो, कानपुर के बिठूर में योगी ने अपनी सभा का ज्यादातर हिस्सा अखिलेश यादव के समय की सरकार को कठघरे में खड़ा करने में खर्च कर दिया। उन्होंने उस दौर को दंगों, भ्रष्टाचार, परिवारवाद और अराजकता से जोड़ते हुए कहा-तब युवाओं का भविष्य और महिलाओं की सुरक्षा पूरी तरह अनदेखी हुई थी। इसके जवाब में योगी ने अपने कार्यकाल में धार्मिक स्थलों के विकास और कानून-व्यवस्था की मजबूती को खास तौर पर बताया।

UP Assembly Election: सोशल मीडिया पर भी सपा को घेर रही BJP

BJP के उत्तर प्रदेश इकाई के सोशल मीडिया हैंडल पर भी योगी के भाषण का एक खास वीडियो साझा किया गया। इसमें उन्होंने सपा को लेकर तीखे राजनीतिक आरोप लगाए और पार्टी के धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए।

अमित शाह ने राम मंदिर और अयोध्या आंदोलन का उठाया मुद्दा

अमित शाह के बयान से इस प्रचार को और धार मिली। लखनऊ में BJP की प्रदेश कार्यसमिति में उन्होंने अयोध्या में नवंबर 1990 की पुलिस फायरिंग का मुद्दा उठाया। तब मुख्यमंत्री मुलायम सिंह थे। शाह ने अखिलेश यादव से पूछा उस वक्त क्या हुआ, अब किस भरोसे दोबारा सत्ता में लौटना चाहते हो? शाह ने राम मंदिर का मुद्दा उठाकर दोनों कालों की तुलना खींच दी।

केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक भी साध रहे निशाना

BJP के दूसरे नेता, जैसे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, भी सपा के शासन में माफिया और कानून-व्यवस्था पर निशाना साध रहे हैं। प्रचार पोस्टरों में भी पुराने और नए शासन की तुलना दिख रही है। अतीक अहमद की तस्वीर, अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई, निवेश, पर्यटन, धार्मिक आयोजनों तक सबकुछ।

UP Election 2027: BJP का दावा- जनता के सामने रख रहे विकास का हिसाब

BJP प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी का कहना है: पार्टी सिर्फ विपक्ष की आलोचना नहीं कर रही, बल्कि बिजली, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेडिकल कॉलेज जैसे विकास के मुद्दों पर भी दोनों सरकारों का हिसाब जनता को दे रही है। उनका मानना है कि वोटर्स को साफ-साफ दिखना चाहिए—2017 से पहले क्या था और अब क्या है।

सपा ने BJP की रणनीति पर उठाए सवाल

लेकिन सपा इसे BJP की उनकी मजबूरी बता रही है। सपा सांसद जावेद अली का दावा लोग अब पुरानी बातों से प्रभावित नहीं होते। पार्टी प्रवक्ता फखरुल हसन ने कहा BJP असली मुद्दों शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार से ध्यान हटाकर चुनाव को सांप्रदायिक रंग दे रही है।

अब बात बिहार की वहां भी NDA ने चुनाव प्रचार में RJD के पुराने शासन को मुख्य मुद्दा बनाया था, जबकि खुद करीब 20 साल शासन कर चुके थे। पीएम मोदी ने उस दौर को 'जंगलराज' बताया और नीतीश कुमार ने कानून-व्यवस्था का हाल याद दिलाया। अब यूपी में भी वही पैटर्न दोहराया जा रहा है।

UP Election 2027: 2027 में रोजगार, शिक्षा और विकास भी होंगे अहम मुद्दे

वैसे, लोकसभा चुनाव 2024 में सपा ने 37, BJP ने 33 सीटें जीतकर समीकरण बदल दिए थे। ऐसे में 2027 के चुनाव में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास और सामाजिक समीकरण जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहेंगे।

असल सवाल यही है वोटर अपने अनुभव, मौजूदा सरकार के काम, और पुरानी सरकार की यादों में किसे ज्यादा मानते हैं? BJP के सामने अपनी विकास की कहानी को साबित करने की चुनौती है, वहीं सपा चाहती है कि बहस पुराने दौर से हटकर मौजूदा सरकार की परफॉर्मेंस पर जाए।