
MP Pappu Yadav: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने अयोध्या राम मंदिर में हुए कथित चंदा चोरी को लेकर संसद परिसर में एक अनोखा सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया था। जिसके बाद देश भर के कई पुलिस स्टेशनों में उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज की गईं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, पप्पू यादव ने अपने विरोधियों और सरकार पर निशाना साधा और कहा कि वे FIR या किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।
विरोधियों द्वारा सनातन-विरोधी और स्टंटमैन कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए सांसद पप्पू यादव ने पूछा कि क्या सनातन और मंदिर के फंड को चुराने वालों को बेनकाब करना और उनके खिलाफ लड़ना गलत है? उन्होंने आगे कहा कि मंदिर की रक्षा करना, उसके फंड को सुरक्षित रखना और देश भर के करोड़ों भक्तों की आस्था का सम्मान करना किसी भी हाल में अपराध नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि असली अपमान तब होता है जब राजनीतिक फायदे के लिए धार्मिक भावनाओं और प्रतीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पप्पू यादव ने कहा कि जब देश का हर नागरिक चोरी में शामिल लोगों के बारे में सवाल उठा रहा है, तब भी प्रधानमंत्री चुप हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी भी कीमत पर इस मुद्दे से पीछे नहीं हटेंगे।
पप्पू यादव ने आगे कहा कि वह किसी भी कीमत पर इस मुद्दे से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि वह किसी भी तरह के विरोध का सामना करने या जरूरत पड़ने पर गोली भी खानी पड़े तो खाएंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोगों को जहां जाकर जो सजा दिलानी हो या एफआईआर करानी हो करा लें। उन्हें इसकी जरा भी परवाह नहीं है।
सत्ताधारी पार्टी के नेताओं द्वारा उन्हें 'नौटंकीबाज' कहे जाने पर पलटवार करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि उन्हें ऐसी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि जो नेता आज ऐसी बातें कर रहे हैं और अब मंत्री बन गए हैं, वे कभी उनके सहयोगी हुआ करते थे। कुछ ने तो उनके साथ ब्लॉक अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया था। मंत्री बनने पर उन्हें बधाई, लेकिन उन्हें अपना इतिहास नहीं भूलना चाहिए।
पप्पू यादव ने आगे कहा कि वह एक सच्चे संत और जनता के सेवक हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर वह संत नहीं हैं, तो क्या वे लोग संत कहलाने के हकदार हैं जो जनता और मंदिरों का पैसा चुराते हैं? उन्होंने सबको याद दिलाया कि वह हर संकट में लोगों के साथ खड़े रहते हैं। चाहे पुलिस एनकाउंटर में मारे गए व्यक्ति के पीड़ित परिवार की मदद करनी हो या COVID-19 महामारी के दौरान देश भर में जरूरतमंदों तक आर्थिक मदद पहुंचानी हो, वह हमेशा अपने साथी नागरिकों की सेवा के लिए तैयार रहे हैं।