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‘UPI टैक्स प्रस्ताव पर नहीं हुई चर्चा’, संसदीय समिति के कांग्रेस सांसदों ने MDR समर्थन के दावे से किया इनकार

UPI MDR Row: कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और मनीष तिवारी ने इस दावे को खारिज कर दिया है कि वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सदस्य के तौर पर उन्होंने UPI पेमेंट पर टैक्स लगाने के प्रस्ताव का समर्थन किया था।
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भारत

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Tanay Mishra

Sep 17, 2026

Manish Tewari

मनीष तिवारी (Photo - ANI)

सरकार द्वारा यूपीआई पेमेंट पर टैक्स (UPI MDR) लगाने की वजह से देशभर में विवाद छिड़ा हुआ है। अब इस मामले में कांग्रेस (Congress) सांसद गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi) और मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने बड़े बयान दिए हैं। दोनों ने इस दावे को खारिज कर दिया है कि उन्होंने वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सदस्य के तौर पर यूपीआई पेमेंट पर टैक्स लगाने के प्रस्ताव का समर्थन किया था।

गोगोई ने यूपीआई पर टैक्स वापस लेने की कही बात

गोगोई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने मोदी सरकार द्वारा हाल ही में घोषित यूपीआई टैक्स प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं की है। जब वित्त विभाग के अधिकारी वित्त समिति के सदस्यों से मिले, तो उनके पास यूपीआई टैक्स को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं था। एमडीआर की ज़रूरत पर सवाल उठाए गए, लेकिन उस समय सरकार के प्रतिनिधियों के पास कोई ठोस या संतोषजनक जवाब नहीं था। मैं फिर से कहता हूं कि हाल की यूपीआई टैक्स नीतियाँ छोटे भारतीय व्यापारियों, वेंडरों और उद्यमियों को नुकसान पहुंचाती हैं और बड़ी अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाती हैं। यूपीआई टैक्स वापस लें। सरेंडर करना बंद करें, पीएम मोदी।"

सरकार कर रही है वाहवाही बटोरने की कोशिश

तिवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संसदीय स्थायी समितियों की कार्यवाही, जो गोपनीय होनी चाहिए, उसका इस्तेमाल अब सरकार अपनी वाहवाही बटोरने के लिए करना चाहती है। मेरे सहयोगी गौरव गोगोई सही कह रहे हैं कि 15 अक्टूबर 2026 से यूपीआई ट्रांज़ैक्शन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के बारे में कोई ठोस प्रस्ताव कभी भी वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सामने नहीं लाया गया - जैसे कि रेट, मात्रा, फीस की रकम, अधिकतम सीमा और छूट के स्लैब आदि। यहाँ तक कि MDR के सिद्धांत या अवधारणा के आधार पर भी, जैसा कि मेरे सहयोगी गौरव गोगोई ने बताया है, समिति की कई बैठकों में सदस्यों ने इसकी ज़रूरत और प्रभावशीलता आदि को लेकर चिंताएं जताई थीं। यह दावा करना कि किसी खास उपाय का समर्थन समिति के 'कुछ सदस्यों' ने किया था, संसदीय समिति की गोपनीय कार्यवाही का गलत और भ्रामक चित्रण है।"

क्या है सरकारी अधिकारी का कहना?

सरकारी अधिकारी के अनुसार 12 अगस्त को जब इस मामले में रिपोर्ट को मंज़ूरी दी गई थी, तब कांग्रेस के पांच सांसद मौजूद थे, जिनमें गोगोई और तिवारी के साथ ही पी. चिदंबरम, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ भी शामिल थे। इस दौरान उनके द्वारा किसी भी तरह की असहमति दर्ज नहीं की गई थी।