सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार: जस्टिस उज्जल भुइयां के साथ बेंच में सुनवाई कर रहीं जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि बच्चों को ऐश करने के लिए कार की चाबियां सौंपना और अनाप-शनाप पैसा देने के लिए माता-पिता जिम्मेदार हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग कार चालक द्वारा दुर्घटना के चर्चित पुणे पोर्श मामले से जुड़े एक केस में सोमवार को गंभीर टिप्पणियां करते हुए कहा है कि खुद के पास समय नहीं होने पर अपने बच्चों पर नियंत्रण न रख पाने के लिए माता-पिता ही दोषी हैं।
जस्टिस उज्जल भुइयां के साथ बेंच में सुनवाई कर रहीं जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि बच्चों को ऐश करने के लिए कार की चाबियां सौंपना और अनाप-शनाप पैसा देने के लिए माता-पिता जिम्मेदार हैं। यह एक गंभीर सामाजिक समस्या को दर्शाता है।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि नाबालिगों को शराब पीने की अनुमति देना, उन्हें गाड़ी देना और बेपरवाह ऐश करने को बढ़ावा देना गंभीर है। ऐसी घटनाओं में एक ही पैटर्न बार-बार दोहराया जाता है, नशे में जश्न मनाने के बाद तेज रफ्तार से गाड़ी चलाना और सड़क पर निर्दोष लोगों या सो रहे निर्दोष लोगों की जान लेना, फिर दोष दूसरों पर डालने, चिकित्सा साक्ष्यों में हेरफेर करने और आपराधिक परिणामों को सीमित करने का प्रयास किया जाता है। कानून को इन लोगों पर शिकंजा कसना होगा।
बेंच इस मामले में सबूत मिटाने के दोषी तीन आरोपियों की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। पुर्ण में नशे में लग्जरी गाड़ी चला रहे नाबालिग कार चालक ने मोटरसाइकिल को टक्कर मारकर घसीटा था जिसमें मध्यप्रदेश के दो युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियरों अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा की मौत हो गई थी। बाद में कार में बैठे नाबालिगों के रक्त के नमूने बदलने पर धोखाधड़ी व सबूत मिटाने के आरोप में तीन जनों को गिरफ्तार किया गया था। बेंच ने आरोपियों के 18 महीने जेल में रहने के आधार पर जमानत अर्जी मंजूर कर ली लेकिन हालात पर कड़ी टिप्पणियां कीं।
यही समस्या है। माता-पिता के पास अपने बच्चों से बात करने और उनके साथ समय बिताने का समय नहीं होता। तो फिर विकल्प क्या है? पैसा, एटीएम कार्ड। इसलिए वे मोबाइल फोन के सहारे अपनी मर्जी से निकल जाते हैं। इसे रोकना होगा।