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क्या है सांसदों के सस्पेंशन का नियम? जानें कितने छिनते है अधिकार

निलंबित किए गए आठ सांसद हैं: मणिकम टैगोर, किरण रेड्डी, प्रशांत पाडोले, हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, गुरजीत औजला, एस वेंकट रमन और डीन कुरियाकोस। इन्हें पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित किया है। 

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Feb 04, 2026
स्पीकर ने 8 सांसदों को किया निलंबित (Photo-IANS)

Parliament Session: संसद में मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 8 सांसदों को निलंबित कर दिया, जिसमें कांग्रेस के सात और एक सीपीएम का सांसद है। जिन सांसदों को सस्पेंड किया उन पर सदन में स्पीकर की सीट पर पेपर फाड़कर उछालने के आरोप लगे हैं।

निलंबित किए गए आठ सांसद हैं: मणिकम टैगोर, किरण रेड्डी, प्रशांत पाडोले, हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, गुरजीत औजला, एस वेंकट रमन और डीन कुरियाकोस। इन्हें पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित किया है। 

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स्पीकर ओम बिरला के एक्शन के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत अन्य कांग्रेस नेताओं ने संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। 

नियम 374 क्या है?

लोकसभा का नियम 374 संसद की कार्यवाही में अनुशासन बनाए रखने से जुड़ा नियम है। इस नियम के तहत अगर कोई सांसद सदन की कार्यवाही में गंभीर व्यवधान, अव्यवस्था या अनुशासनहीन व्यवहार करता है, तो लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) को अधिकार होता है कि वह उस सांसद को सदन से निलंबित कर सकता है और उसे तुरंत सदन से बाहर जाने का निर्देश दे सकता है। वहीं यदि सदन चाहे तो बाद में यह फैसला वापस ले सकता है। 

सांसदों का क्या अधिकार छिन जाता है?

जब किसी सांसद को निलंबित किया जाता है, तो उससे कई संसदीय अधिकार अस्थायी रूप से छिन जाते हैं। वह सदन में प्रवेश नहीं कर सकता है और सदन की किसी भी कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकता। उसका बहस और प्रश्न पूछने का अधिकार भी खत्म हो जाता है। 

सदन में किसी भी बिल, प्रस्ताव या प्रस्ताव पर वोट नहीं दे सकता। वहीं यदि वह किसी संसदीय समिति का सदस्य है, तो निलंबन अवधि में भाग नहीं ले सकता। कोई ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, स्थगन प्रस्ताव, प्राइवेट मेंबर बिल आदि नहीं दे सकता। इसके अलावा सदन की सुविधाएं भी बंद हो सकती है। 

क्या-क्या अधिकार बने रहते हैं?

  • सांसद की सदस्यता खत्म नहीं होती (जब तक अयोग्यता न हो)
  • वेतन/भत्ता आमतौर पर निलंबन अवधि में नहीं मिलता
  • वह अपने क्षेत्र का सांसद बना रहता है
  • राजनीतिक दल की सदस्यता बनी रहती है

पहले कब-कब बड़ी कार्रवाई हुई?

2023 के शीतकालीन सत्र में संसद के दोनों सदनों से कुल 141 सांसद निलंबित किए गए थे। इनमें 95 लोकसभा और 46 राज्यसभा के सांसद शामिल थे।

15वीं लोकसभा के समय आंध्र प्रदेश के विभाजन के मुद्दे पर हंगामे के चलते कांग्रेस के कई सांसदों को सदन से निलंबित किया गया था।

साल 2015 में तत्कालीन लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सदन के बीचों-बीच तख्तियां (प्लेकार्ड) लेकर प्रदर्शन करने पर कांग्रेस के 25 सांसदों को पांच दिन के लिए निलंबित कर दिया था।

मार्च 1989 में भी लोकसभा से 63 सांसद निलंबित किए गए थे। ये सांसद इंदिरा गांधी की हत्या की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट पेश करने की मांग को लेकर हंगामा कर रहे थे।

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Published on:
04 Feb 2026 10:32 am
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