पटना हाईकोर्ट की जस्टिस मोहित कुमार शाह और जस्टिस अरुण कुमार झा की बेंच ने सोमवार को फैसला सुनाया कि शराब तस्करी के मामले में पकड़ी गई कार नहीं छोड़ी जाएगी।
पटना हाईकोर्ट ने शराब तस्करी के मामले में जब्त हुई कार छोड़ने से साफ इंकार कर दिया है। बिहार के सख्त शराबबंदी कानून को एक बार फिर मजबूती मिली है। कोर्ट ने साफ कहा कि 350 लीटर से ज्यादा विदेशी शराब बरामद होने के बाद गाड़ी छोड़ना जनता के हित में नहीं होगा।
पटना हाईकोर्ट के जस्टिस मोहित कुमार शाह और जस्टिस अरुण कुमार झा की बेंच ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता प्रयागध्वज यादव ने अपनी कार छुड़ाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
उनकी दलील थी कि कार Zoomcar ऐप पर किराए पर दी गई थी और उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उसमें शराब तस्करी हो रही है।
सरकार की ओर से वकील प्रशांत प्रताप ने जोरदार विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि गाड़ी से 350 लीटर विदेशी शराब बरामद हुई थी। इतनी बड़ी मात्रा में शराब पकड़े जाने को मामूली नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को सही माना। जजों ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब बरामद होने पर गाड़ी छोड़ना गलत मिसाल कायम करेगा। इससे शराब तस्करों को गलत संदेश जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब्ती पूरी तरह जायज थी क्योंकि मामला बहुत गंभीर है।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे बिहार शराब निषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 92 के तहत अपील दायर कर सकते हैं। हाईकोर्ट में सीधे रिट याचिका दायर करना कानून के मुताबिक सही नहीं है। इस आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।
बिहार में शराबबंदी अप्रैल 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने लागू की थी। तब से यह कानून लगातार लागू है।
हाल ही में नई सरकार बनने के बाद NDA के सहयोगी दल के नेता जैसे राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद और मोकामा के JD(U) विधायक अनंत कुमार सिंह समेत कई नेताओं ने कानून की समीक्षा की मांग की है। लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया है कि राज्य में शराबबंदी जारी रहेगी। कोई बदलाव नहीं होगा।