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सुप्रीम कोर्ट में ‘Operation Sindoor’ ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन के खिलाफ याचिका दायर

India Pakistan War: 'ऑपरेशन सिंदूर' के नाम को व्यावसायिक उपयोग के लिए ट्रेडमार्क के रूप में रजिस्टर करने की कोशिशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।

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May 11, 2025

Operation Sindoor: भारतीय सेना द्वारा हाल ही में आतंकवाद के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' के नाम को व्यावसायिक उपयोग के लिए ट्रेडमार्क के रूप में रजिस्टर करने की कोशिशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' देश की भावनाओं से जुड़ा हुआ है और इसका व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

व्यवसाय नहीं सैन्य अभियान का नाम

याचिका के अनुसार, 'ऑपरेशन सिंदूर' एक सैन्य अभियान का नाम है, जो पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई को दर्शाता है। यह अभियान राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति का प्रतीक है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इस नाम का व्यावसायिक उपयोग देश की भावनाओं का अपमान है और इसे रोकने के लिए ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

रिलायंस ने वापस ली थी अर्जी

इससे पहले, मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज सहित चार आवेदकों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के नाम को ट्रेडमार्क के रूप में रजिस्टर करने के लिए ट्रेडमार्क्स रजिस्ट्री में आवेदन किया था। हालांकि, इस कदम पर सार्वजनिक आक्रोश के बाद रिलायंस ने अपनी अर्जी वापस ले ली और स्पष्ट किया कि यह आवेदन एक जूनियर कर्मचारी द्वारा अनजाने में दायर किया गया था।

याचिका में क्या मांग?

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे राष्ट्रीय महत्व के नामों को ट्रेडमार्क के रूप में रजिस्टर करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। याचिका में कहा गया है कि इस तरह के कदम देश की एकता और सैन्य बलिदानों का अपमान करते हैं।

नौ आतंकी ठिकानों को किया नष्ट

'ऑपरेशन सिंदूर' को भारतीय सेना ने पहलगाम हमले के जवाब में शुरू किया था, जिसमें नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया। इस अभियान को देशभर में व्यापक समर्थन मिला और इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रतीक माना गया। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सूर्यकांत और पूर्व मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना ने भी इस अभियान की सराहना की थी। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि वह इस याचिका पर क्या फैसला सुनाता है। इस मामले को राष्ट्रीय भावनाओं और व्यावसायिक नैतिकता के बीच एक महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा रहा है।

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