राष्ट्रीय

पेट्रोल-डीजल-गैस को लेकर आया बड़ा अपडेट, बढ़ सकते हैं दाम

Petrol-Diesel Price Hike India: पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारत पर पड़ सकता है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी महंगे होने की आशंका है। सरकार जल्द फैसला ले सकती है, क्योंकि चार साल से कीमतों में बदलाव नहीं हुआ है।

3 min read
May 02, 2026
केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल-गैस को लेकर ले सकती बड़ा फैसला (इमेज में पीएम मोदी) सोर्स: पत्रिका.कॉम

Fuel Price India 2026 Update: पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से देश में आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल व घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ सकते हैं? जानकार सूत्रों के अनुसार सरकारी

अधिकारियों ने इस आशंका से इनकार नहीं किया है लेकिन अधिकृत तौर पर इसकी कोई पुष्टि भी नहीं की है। सूत्रों ने बताया कि अगले सप्ताह तक डीजल व पेट्रोल के दाम प्रति लीटर चार-पांच रुपए तक तथा घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 40-50 रुपए तक बढ़ सकते हैं।

ये भी पढ़ें

अमेरिका आखिर ईरान से चाहता क्या है? राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का जानिए मकसद, कौन कितना ताकतवर…समझिए युद्ध के पीछे की गणित

सूत्रों के अनुसार इस पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। उधर,केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने शुक्रवार को सूरत में 'वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन में कहा कि ऊर्जा बाजारों में वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने चार साल और खाड़ी युद्ध के 60 दिन बीत जाने के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतें 39 से 66% तक बढ़ गई हैं। सरकार ने जानबूझकर किसी भी तरह के प्रतिक्रियात्मक या घबराहट में लिए गए नीतिगत फैसलों से परहेज किया।

कंपनियों को हो रहा घाटा

पिछले सप्ताह, पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वैश्विक क्रूड कीमतों में उछाल के कारण तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 20 रुपए और डीजल पर 100 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। अधिकारी ने यह भी कहा था कि कीमतों में वृद्धि की कोई योजना नहीं है। हालांकि सरकार ने मई की शुरुआत में मासिक नियमित समीक्षा के तहत कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 997 रुपए बढ़ा दी थी लेकिन घरेलू सिलेंडर के दाम यथावत रखे।

पेट्रोल में 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग लाने का प्रस्ताव

ताजा जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत ई85 (85% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) और ई100 (लगभग शुद्ध एथेनॉल) को देश के ईंधन ढांचे में शामिल करने का प्रस्ताव है। फिलहाल देश में ई20 (20% एथेनॉल) का उपयोग व्यापक रूप से हो रहा है, जिसे 2025 में लागू किया गया था। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी प्रस्ताव में पेट्रोल की लेबलिंग को ई10/ई से बदलकर ई10/ई20 करने और ई85, ई100 को आधिकारिक मान्यता देने की बात कही गई है। डीजल में भी बायोडीजल मिश्रण बी10 से बढ़ाकर बी100 तक करने का सुझाव है। हाइड्रोजन ईंधन की शब्दावली 'हाइड्रोजन सीएन' से बदलकर 'हाइड्रोजन सीएनजी' करने और कुछ श्रेणियों में वाहन का अधिकतम वजन 3000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3500 किलोग्राम करने का प्रस्ताव भी शामिल है। ड्राफ्ट पर सार्वजनिक रूप से सुझाव मांगे गए हैं, जिसके बाद अंतिम फैसला होगा।

वाहनों और उपभोक्ताओं पर संभावित असर

-फिलहाल ई20 ही मानक रहेगा, तुरंत कोई बदलाव नहीं
-भविष्य में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का चलन बढ़ेगा
-खरीदारों को ईंधन संगतता पर अधिक ध्यान देना होगा
-वाहन कीमतों में वृद्धि की संभावना
-पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की अलग-अलग किस्मों के लिए अलग-अलग स्टोरेज और डिस्पेंसिंग सिस्टम की जरूरत होगी

एक लीटर एथेनॉल उत्पादन में लगता है 10,000 लीटर पानी

सरकार जहां एथेनॉल मिश्रण को आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ ईंधन के रूप में आगे बढ़ा रही है, वहीं विशेषज्ञ इसके जल प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं। एथेनॉल गन्ना, मक्का और चावल जैसी फसलों से तैयार होता है, जिनकी खेती में भारी पानी लगता है। आंकड़ों के मुताबिक चावल से एक लीटर एथेनॉल बनाने में करीब 10,790 लीटर पानी खर्च होता है, क्योंकि 1 किलो चावल उगाने में ही 3,000-5,000 लीटर पानी लगता है। वहीं मक्का में 4,670 लीटर और गन्ने में 3,630 लीटर पानी प्रति लीटर एथेनॉल लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे में एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से पहले से जल-संकट झेल रहे क्षेत्रों में भूजल पर दबाव बढ़ेगा और पेयजल किल्लत और गंभीर हो सकती है।

ये भी पढ़ें

डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ पर ले लिया बड़ा फैसला, अब लगा दिया 25 फीसदी शुल्क
Also Read
View All