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डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ पर ले लिया बड़ा फैसला, अब लगा दिया 25 फीसदी शुल्क

ट्रंप ने कहा कि अगले हफ्ते से यूरोपीय यूनियन से आने वाली कारों और ट्रकों पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ा दी जाएगी। ट्रंप ने फैसला किया है कि टैरिफ 25 फीसदी बढ़ेगी।

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भारत

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Anurag Animesh

May 01, 2026

Donald Trump

Donald Trump(Image-ANI)

Donald Trump On Tariff: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार में हलचल मचा दी है। इस बार निशाने पर यूरोप है। ट्रंप ने घोषणा की है कि अगले हफ्ते से यूरोपीय यूनियन से अमेरिका आने वाली कारों और ट्रकों पर टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। ट्रंप ने यह ऐलान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यूरोपीय यूनियन पहले हुए व्यापार समझौते का सही तरीके से पालन नहीं कर रहा है, इसलिए यह कदम उठाया जा रहा है। उनका कहना है कि अब अमेरिका अपने हितों को प्राथमिकता देगा।

ट्रंप ने क्या कहा?


ट्रंप ने एक तरह से कंपनियों को सीधा संदेश भी दे दिया है। उन्होंने कहा कि अगर यूरोपीय कंपनियां अपनी कार और ट्रक अमेरिका में बनाती हैं, तो उन पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। यानी, उत्पादन अमेरिका में होगा तो टैक्स से राहत मिलेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस नीति का असर दिखने लगा है। अमेरिका में कई नए ऑटोमोबाइल प्लांट बन रहे हैं, जिनमें 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश हो चुका है। ट्रंप के मुताबिक, यह ऑटो इंडस्ट्री के इतिहास में एक बड़ा बदलाव है और इससे अमेरिकी लोगों को रोजगार मिलेगा।

‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और सख्त रुख


ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को और ज्यादा आक्रामक तरीके से लागू कर रहे हैं। इसका मतलब साफ है, घरेलू उद्योगों को मजबूत करना और विदेशी सामान पर निर्भरता कम करना। यही वजह है कि अमेरिका पहले भी कई देशों पर टैरिफ लगा चुका है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। पहले भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया था, जिसे बाद में रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर बढ़ाकर 50 फीसदी तक कर दिया गया। हालांकि बाद में हालात बदले और टैरिफ में राहत दी गई।

वैश्विक असर की आशंका


इस तरह के फैसलों का असर सिर्फ अमेरिका और यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। साथ ही, देशों के बीच व्यापारिक तनाव भी बढ़ सकता है। ट्रंप का यह नया फैसला एक बार फिर संकेत दे रहा है कि आने वाले समय में वैश्विक व्यापार और ज्यादा सख्त होने वाला है।