राष्ट्रीय

सोमनाथ विध्वंस के 1000 साल पूरे, पीएम मोदी ने ब्लॉग पोस्ट शेयर करते हुए नेहरू पर कसा तंज

आज सोमनाथ मंदिर के विध्वंस के 1000 साल पूरे हो गए है। पीएम मोदी ने इस मौके पर एक ब्लॉग पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है कि, देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू इस मंदिर के पुनर्निर्माण के पक्ष में नहीं थे।
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Jan 05, 2026
PM Modi
पीएम मोदी (फोटो- आईएएनएस)

सोमनाथ मंदिर के विध्वंस के 1000 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने खास ब्लॉग पोस्ट शेयर किया है। इस पोस्ट में पीएम ने मंदिर के विध्वंस और पुनरुत्थान की अद्भुत कहानी को स्मरण किया है, जो भारत की सभ्यतागत चेतना को परिभाषित करती है। मंदिर के पुनर्निर्माण से जुड़ा एक किस्सा शेयर करते हुए पीएम मोदी ने अपने इस पोस्ट में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर भी तंज कसा। पीएम ने अपने पोस्ट में कहा कि, नेहरू मंदिर को फिर से बनाने के पक्ष में नहीं थे।

इस साल सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे हुए

वर्ष 1026 ईस्वी में, आज से ठीक एक हजार साल पहले, सोमनाथ का पहला विध्वंस हुआ था। इसी मौके पर पीएम ने पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, 'सोमनाथ' शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है। भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात में, प्रभास पाटन नाम की जगह पर स्थित सोमनाथ, भारत की आत्मा का शाश्वत प्रस्तुतिकरण है। पीएम मोदी ने आगे लिखा, साल 1026 के बाद से समय-समय पर इस मंदिर को उसके पूरे वैभव के साथ पुनर्निर्मित करने के प्रयास जारी रहे हैं। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका। संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है।

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का भी किया जिक्र

प्रधानमंत्री ने नेहरू के साथ-साथ पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और सरदार वल्लभभाई पटेल का भी अपने पोस्ट में जिक्र किया। उन्होंने लिखा, 11 मई 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण संपन्न हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ वो समारोह ऐतिहासिक था, जब मंदिर के द्वार दर्शनों के लिए खोले गए थे। पीएम मोदी ने आगे लिखा, आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पवित्र दायित्व सरदार वल्लभभाई पटेल के सक्षम हाथों में आया। 1947 में दीवाली के समय उनकी सोमनाथ यात्रा हुई। उस यात्रा के अनुभव ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, उसी समय उन्होंने घोषणा की कि यहीं सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होगा।

नेहरू पर कसा तंज

पीएम ने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू का जिक्र करते हुए कहा, तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस घटना से अधिक उत्साहित नहीं थे। वो नहीं चाहते थे कि माननीय राष्ट्रपति और मंत्री इस समारोह का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि इस घटना से भारत की छवि खराब होगी। लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे, और फिर जो हुआ, उसने एक नया इतिहास रच दिया। सोमनाथ मंदिर का कोई भी उल्लेख के. एम. मुंशी के योगदानों को याद किए बिना अधूरा है। उन्होंने उस समय सरदार पटेल का प्रभावी रूप से समर्थन किया था। सोमनाथ पर उनका कार्य, विशेष रूप से उनकी पुस्तक 'सोमनाथ, द श्राइन इंटरनल', अवश्य पढ़ी जानी चाहिए।

Updated on:
05 Jan 2026 10:29 am
Published on:
05 Jan 2026 10:29 am
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