
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए बैंकिंग सेक्टर को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखते हुए कहा कि अब हमारा यह लक्ष्य होना चाहिए कि विश्व के टॉप-5 बैंकों में भारतीय बैंक भी हो। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को अब केवल घरेलू प्रगति तक ही सीमित नहीं रहना है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाना बेहद जरूरी है।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "हम उस दौर से गुजर रहे हैं, जहां देशवासियों को बड़ा सोचना होगा। हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत है, इसमें बैंकिंग सेक्टर का अहम रोल रहा है। अब हमारा यह लक्ष्य होना चाहिए कि कम से कम एक भारतीय बैंक दुनिया के टॉप-5 बैंकों में अपनी जगह बनाए।"
वहीं, अब समय की मांग है कि दुनिया की टॉप-5 फार्मा कंपनियों में भी कम से कम एक भारतीय कंपनी हो। उन्होंने कहा कि यह देश के हर नागरिक और उद्योग जगत के सहयोग से संभव होगा, जो 'विकसित भारत' के संकल्प को मजबूती देगा।
नई दिल्ली में आयोजित 'PSB कॉन्फ्लुएंस 2026' में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार जल्द ही बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की समीक्षा और सुधार के लिए एक हाई-लेवल कमेटी के गठन की घोषणा करेगी। वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय बैंकिंग क्षेत्र को 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के अनुकूल तैयार करना और उभरती आर्थिक जरूरतों के अनुसार नई रणनीतियां बनाना है।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के बैंकिंग क्षेत्र पर चर्चा करने के लिए इससे बेहतर समय नहीं हो सकता है। वित्त मंत्री ने कहा कि उच्च-स्तरीय समिति अपनी सिफारिशों और सुझावों को अंतिम रूप देने के बाद सरकार 'विकसित भारत 2047' के विजन के अनुरूप भारतीय अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक फैसले लागू करने की तैयारी करेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी और युवाओं को वित्तीय सेवाओं से जोड़ना सरकार का लक्ष्य है। बैंकिंग सेक्टर पर केंद्र सरकार का फोकस पिछले एक दशक से रहा है। साल 2017 से पहले देश में कुल 27 सरकारी बैंक थे, जो विलय के बाद घटकर 12 रह गए।