
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता की। पीएम ऑफिस (PMO) जिसका नाम अब सेवा तीर्थ (Seva Teerth) कर दिया गया है, में शाम करीब 5 बजे यह मीटिंग शुरू हुई, जो करीब 9:30 तक चली। यह मीटिंग मंत्रिपरिषद की लगभग 11 महीनों में पहली पूर्ण मीटिंग थी, जिसमें सभी केंद्रीय मंत्रियों, स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल हुए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मंत्रिपरिषद में पीएम मोदी के साथ 30 कैबिनेट मंत्री, 5 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 36 राज्य मंत्री शामिल हैं।
पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई इस हाई-लेवल मीटिंग में 9 प्रमुख मंत्रालयों द्वारा शासन संबंधी प्राथमिकताओं, सुधारों और भविष्य की कार्य योजनाओं पर प्रज़ेंटेशन दी गईं, जिनका उद्देश्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की गति को तेज़ करना है। पीएम मोदी ने भी साफ कर दिया कि 'विकसित भारत 2047' सिर्फ एक नारा नहीं बल्कि सरकार की प्रतिबद्धता है।
मंत्रियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने तेज़ निर्णय लेने और कुशल शासन की ज़रूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि फाइलों पर अनावश्यक देरी किए बिना जल्द कार्रवाई होनी चाहिए और कम से कम समय में ज़्यादा से ज़्यादा उत्पादकता हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने मंत्रालयों से शासन में सरलता लाने और सुधारों पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित करने का भी आग्रह किया। इसके अलावा पीएम मोदी ने सभी मंत्रियों को जनता से सक्रिय रूप से संपर्क करने और पिछले 12 वर्षों में सरकार की उपलब्धियों को उजागर करने का भी निर्देश दिया।
इस हाई-लेवल मीटिंग में मिडिल ईस्ट संकट (Middle East Conflict) पर भी चर्चा हुई। होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में अमेरिका (United States of America) नाकाबंदी से ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए पीएम मोदी ने मंत्रिपरिषद से आग्रह किया कि वो एलपीजी से खाना पकाने की गैस के विकल्प के रूप में बायोगैस को बढ़ावा देने सहित वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तत्काल खोज करें।